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पश्चिम बंगाल: "गाय काटने के बाद से शुरू हुए बुरे दिन...", पत्नी ने बकरीद पर कुर्बानी से रोका तो पति ने लगा ली फाँसी

पश्चिम बंगाल के बर्धमान में दिल दहला देने वाली घटना। बकरीद पर बकरे की कुर्बानी को लेकर मियाँ-बीवी में हुआ विवाद, ई-रिक्शा चालक जफर अली शेख ने लगाई फाँसी। बेटे ने किया हैरान करने वाला खुलासा, जानें क्या है पूरा मामला।

पश्चिम बंगाल: "गाय काटने के बाद से शुरू हुए बुरे दिन...", पत्नी ने बकरीद पर कुर्बानी से रोका तो पति ने लगा ली फाँसी

प्रतीकात्मक तस्वीर AI "गाय काटने के बाद से शुरू हुए बुरे दिन..."

बंगाल

2:01 PM, May 25, 2026

O News हिंदी Desk

पश्चिम बंगाल: बकरीद पर कुर्बानी को लेकर पति-पत्नी में विवाद, ई-रिक्शा चालक ने लगाई फाँसी; बेटे का दावा- 'गाय काटने के बाद से शुरू हुए बुरे दिन'

कोलकाता/पूर्व बर्धमान: पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के कालना कस्बे से एक बेहद चौंकाने वाला और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ आगामी बकरीद (Eid-ul-Adha) पर जानवर की कुर्बानी देने को लेकर हुए पारिवारिक विवाद के बाद 54 वर्षीय एक व्यक्ति ने कथित तौर पर फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान जफर अली शेख के रूप में हुई है, जो पेशे से ई-रिक्शा चालक था।

इस घटना ने न केवल स्थानीय इलाके को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। मृतक के बेटे ने इस घटना के पीछे एक बेहद चौंकाने वाला पारिवारिक डर और अंधविश्वास/मान्यता का भी खुलासा किया है।

क्या है पूरा मामला? (The Background of the Incident)

मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, कालना कस्बे के रहने वाले जफर अली शेख हर साल की तरह इस बार भी बकरीद के पवित्र मौके पर कुर्बानी देने की तैयारी कर रहे थे। पेशे से ई-रिक्शा चालक होने के बावजूद, अपनी धार्मिक आस्था के चलते उन्होंने इस साल की कुर्बानी के लिए बाजार से एक बकरा भी खरीद लिया था।

पारिवारिक विवाद की शुरुआत: जफर अली शेख तो कुर्बानी के लिए पूरी तरह तैयार थे, लेकिन उनकी पत्नी इस बार घर में किसी भी जानवर की कुर्बानी देने के सख्त खिलाफ थीं। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जिसने धीरे-धीरे एक बड़े विवाद का रूप ले लिया।

बंद कमरे में उठाया खौफनाक कदम

प्रत्यक्षदर्शियों और पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, बहस बढ़ने के बाद जफर अली शेख अत्यधिक तनाव और गुस्से में आ गए। वह अपने कमरे में चले गए और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। काफी देर तक जब कमरे से कोई हलचल नहीं हुई, तो परिवार के सदस्यों को अनहोनी की आशंका हुई।

परिजनों ने जब दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जफर अली शेख कमरे में फंदे से लटके हुए थे। आनंद-फानन में उन्हें फंदे से उतारकर नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है।

बेटे का बड़ा खुलासा: "गाय की कुर्बानी के बाद से शुरू हुए बुरे दिन"

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब मृतक जफर अली शेख के बेटे बादशाह ने मीडिया के सामने आकर बयान दिया। बादशाह के बयान ने इस आत्महत्या के पीछे छिपे मानसिक तनाव और पारिवारिक डर की एक अलग ही कहानी बयां की है।

बादशाह ने बताया:

  1. असमंजस और डर का माहौल: "इस बार ईद पर कुर्बानी को लेकर हमारे परिवार में काफी समय से डर और असमंजस का माहौल बना हुआ था। दरअसल, कुछ समय पहले हमारे परिवार में गाय की कुर्बानी दी गई थी, जिसके बाद से ही हमारे घर के हालात बिगड़ने लगे और हमारे बुरे दिन शुरू हो गए।"
  2. अम्मी क्यों थीं खिलाफ?: बादशाह के मुताबिक, उसकी माँ (जफर की पत्नी) का मानना था कि पिछली बार की कुर्बानी के बाद से ही घर में परेशानियाँ आ रही हैं, इसलिए वह इस बार किसी भी कीमत पर घर में किसी भी जानवर की कुर्बानी नहीं चाहती थीं। वह कानूनी और सामाजिक नियमों को लेकर भी डरी हुई थीं।
  3. अब्बा की जिद: दूसरी ओर, जफर अली शेख अपनी परंपरा और धार्मिक रीति-रिवाजों को छोड़ने को तैयार नहीं थे। जब पत्नी ने गाय की जगह बकरा लाने पर भी आपत्ति जताई, तो जफर इसे बर्दाश्त नहीं कर पाए और उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।

पश्चिम बंगाल में पशु क्रूरता और नियमों को लेकर भ्रम

इस घटना के पीछे एक और पहलू जो सामने आ रहा है, वह है जानवरों की कुर्बानी को लेकर बने नियम और समाज में फैला भ्रम। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जफर की पत्नी के मन में यह डर भी था कि पश्चिम बंगाल में कुछ विशेष नियमों और प्रतिबंधों के चलते जानवरों की कुर्बानी से कानूनी अड़चनें पैदा हो सकती हैं।

भारत में 'द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट' (Prevention of Cruelty to Animals Act) के तहत पशुओं के साथ क्रूरता को लेकर कड़े नियम हैं, और समय-समय पर न्यायालयों द्वारा भी खुले में या प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। इसी तरह के कानूनी झंझटों और पिछली घरेलू परेशानियों के डर से जफर की पत्नी ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी, जो अंततः एक त्रासदी में बदल गई।

मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक परामर्श की आवश्यकता

यह घटना इस बात का एक दुखद उदाहरण है कि कैसे धार्मिक आस्था, पारिवारिक मतभेद और मानसिक तनाव मिलकर किसी व्यक्ति को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर देते हैं। मनोचिकित्सकों का मानना है कि त्योहारों के समय अक्सर परिवारों में उम्मीदों और परंपराओं का भारी दबाव होता है। ऐसे में यदि वैचारिक मतभेद खुलकर विवाद का रूप ले लें, तो वह व्यक्ति के मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकते हैं।

नोट: आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। यदि आप या आपका कोई परिचित किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव, डिप्रेशन या अवसाद से गुजर रहा है, तो कृपया तुरंत किसी विशेषज्ञ या हेल्पलाईन नंबर से संपर्क करें।

निष्कर्ष (Conclusion)

बर्धमान के कालना की यह घटना समाज के सामने कई सवाल खड़े करती है। एक तरफ जहाँ धार्मिक रीति-रिवाजों को पूरा करने की जिद थी, तो दूसरी तरफ अंधविश्वास, डर और कानूनी पेचीदगियों का खौफ। इन दोनों के बीच के टकराव ने एक हंसते-खेलते परिवार के मुखिया को उनसे हमेशा के लिए छीन लिया। फिलहाल पुलिस इस मामले के हर पहलू की बारीकी से जाँच कर रही है ताकि आत्महत्या के असली कारणों को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके।

Source: ऑपइंडिया

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