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गाजियाबाद: जुमे की नमाज के बाद 'Ex-Muslim' सलीम पर जानलेवा हमला, चाकू से गोदकर गला रेता; हालत गंभीर

"गाजियाबाद के लोनी में 'Ex-Muslim' सलीम वास्तिक पर जुमे की नमाज के बाद जानलेवा हमला। हमलावरों ने चाकू से पेट, सीने और गले पर वार किए। सलीम की हालत गंभीर, दिल्ली के GTB अस्पताल में भर्ती। जानें क्या है पूरा मामला और क्यों निशाने पर आए इस्लाम सुधारवादी सलीम।"

गाजियाबाद: जुमे की नमाज के बाद 'Ex-Muslim' सलीम पर जानलेवा हमला, चाकू से गोदकर गला रेता; हालत गंभीर

जुमे की नमाज के बाद 'Ex-Muslim' सलीम पर जानलेवा हमला

uttar pradesh

3:53 PM, Feb 27, 2026

O News हिंदी Desk

गाजियाबाद के लोनी में 'Ex-Muslim' सलीम पर जानलेवा हमला: जुमे के दिन चाकू से गोदा, हालत गंभीर

दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (लोनी) से एक दहला देने वाली खबर सामने आई है। खुद को 'एक्स-मुस्लिम' और 'इस्लाम सुधारवादी' बताने वाले सलीम वास्तिक पर अज्ञात हमलावरों ने जानलेवा हमला किया है। यह हमला उस समय हुआ जब पूरा इलाका रमजान के पाक महीने में जुमे की नमाज की तैयारी और इबादत में जुटा था। हमलावरों ने सलीम के शरीर पर कई जगह चाकू से वार किए हैं, जिससे उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

क्या है पूरी घटना? (The Incident)

शुक्रवार (जुमे) की सुबह, जब लोग सुबह की नमाज के बाद अपने दैनिक कार्यों में जुटे थे, तभी लोनी इलाके में सलीम वास्तिक को निशाना बनाया गया। चश्मदीदों और शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलावरों ने बेहद क्रूरता का परिचय देते हुए सलीम के पेट, सीने और गले पर धारदार हथियारों (चाकू) से ताबड़तोड़ वार किए।

हमले के बाद सलीम लहूलुहान होकर गिर पड़े। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उन्हें तुरंत दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनके गले पर लगा घाव काफी गहरा है, जिसके कारण उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और वे फिलहाल 'लाइफ सपोर्ट' पर बताए जा रहे हैं।

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कौन हैं सलीम वास्तिक? (Who is Salim Vastik?)

सलीम वास्तिक सोशल मीडिया और डिजिटल स्पेस में एक जाना-पहचाने नाम हैं। वे खुद को 'Ex-Muslim' (पूर्व-मुस्लिम) के तौर पर पेश करते हैं और अक्सर इस्लाम की रूढ़िवादी परंपराओं पर मुखर होकर अपनी राय रखते हैं।

  1. सुधारवादी दृष्टिकोण: सलीम का दावा है कि वे इस्लाम के भीतर व्याप्त कुरीतियों को दूर करना चाहते हैं।
  2. सार्वजनिक बहस: वे कई बार टीवी डिबेट्स और यूट्यूब टॉक शो में मौलानाओं के साथ तीखी बहस करते देखे गए हैं।
  3. विवादों से नाता: अपने बयानों के चलते वे अक्सर कट्टरपंथियों के निशाने पर रहते हैं। हाल ही में उन पर 'मजहबी भावनाओं को भड़काने' के आरोप में दो अलग-अलग मामले भी दर्ज किए गए थे।
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"आवाज दबाने की कोशिश" - साथियों के गंभीर आरोप

सलीम के करीबी सहयोगियों और दोस्तों ने इस हमले को सुनियोजित साजिश करार दिया है। उनके साथी समीर और एहसान ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह हमला सलीम के विचारों को दबाने के लिए किया गया है।

एहसान ने भावुक होते हुए कहा:

"यह हमला सिर्फ सलीम पर नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। वे केवल सवाल पूछ रहे थे, लेकिन कुछ लोगों को संवाद से ज्यादा हिंसा पर भरोसा है। जुमे के दिन और रमजान के महीने में इस तरह का कृत्य करना दिखाता है कि हमलावरों के मन में कानून का कोई डर नहीं है।"

अभी तक पुलिस ने हमलावरों की आधिकारिक पहचान उजागर नहीं की है, लेकिन स्थानीय स्तर पर पुलिस की कई टीमें सीसीटीवी फुटेज खंगालने और संदिग्धों की धरपकड़ में जुट गई हैं।

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सोशल मीडिया पर फूटा आक्रोश

जैसे ही सलीम पर हमले की खबर सोशल मीडिया पर फैली, 'Ex-Muslim' कम्युनिटी और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसकी कड़ी निंदा शुरू कर दी। ट्विटर (X) पर लोग उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं और यूपी पुलिस से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में वैचारिक मतभेदों के प्रति बढ़ती असहिष्णुता को दर्शाती हैं। क्या किसी के विचारों से असहमत होने का मतलब उसकी जान लेना है? यह सवाल आज गाजियाबाद की गलियों से लेकर सोशल मीडिया के गलियारों तक गूँज रहा है।

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पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

गाजियाबाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक तनाव न फैले। पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है:

  1. एफआईआर दर्ज: अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या के प्रयास (IPC/BNS की संबंधित धाराओं) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
  2. जांच टीमें: 3 से 4 अलग-अलग टीमें हमलावरों के रूट को ट्रैक कर रही हैं।
  3. बयान: पुलिस सलीम की हालत में सुधार होने का इंतजार कर रही है ताकि उनका आधिकारिक बयान दर्ज किया जा सके।
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निष्कर्ष: क्या हम संवाद की क्षमता खो रहे हैं?

सलीम वास्तिक पर हुआ यह हमला एक बड़े खतरे की ओर इशारा करता है। लोकतंत्र में असहमति की जगह हमेशा होनी चाहिए। चाहे कोई सलीम के विचारों से सहमत हो या असहमत, हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकती।

रमजान जैसे पवित्र महीने में, जो धैर्य और भाईचारे का संदेश देता है, ऐसी हिंसक घटना समाज के ताने-बाने को कमजोर करती है। फिलहाल, सभी की निगाहें जीटीबी अस्पताल पर टिकी हैं, जहाँ सलीम जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं।

Source: Onewshindi

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