भारत की GDP ने तोड़े सारे अनुमान, 7.8% Growth देखकर IMF भी बोला: दुनिया का ग्रोथ इंजन है भारत
ऊर्जा संकट और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने शानदार प्रदर्शन किया है। GDP Growth 7.8% रही, जो अनुमान से बेहतर है। IMF ने भारत को दुनिया का अहम Growth Engine बताया है।

भारत की GDP ने तोड़े सारे अनुमान, 7.8% Growth देखकर IMF भी बोला: दुनिया का ग्रोथ इंजन है भारत
दिल्ली
5:35 PM, Sep 14, 2026
O News हिंदी Desk
भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर दुनिया को अपनी मजबूती का संकेत दिया है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में भारत की वास्तविक GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी दर्ज की गई, जो कई अनुमानों से बेहतर रही। खास बात यह है कि इस दौरान दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा कीमतों और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई थीं। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत रही।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने भारत के इस प्रदर्शन की तारीफ करते हुए देश को वैश्विक आर्थिक विकास का एक अहम इंजन बताया है। IMF के मुताबिक भारत की 7.8 फीसदी की वृद्धि उसके स्टाफ के अनुमान और अन्य बाजार अनुमानों से बेहतर रही। संस्था ने इस मजबूत प्रदर्शन के पीछे खास तौर पर सर्विस सेक्टर और निर्यात में उम्मीद से बेहतर गतिविधि को महत्वपूर्ण कारण बताया।
ऊर्जा संकट के बीच भारत ने दिखाई मजबूती
भारत की आर्थिक ग्रोथ ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था ऊर्जा संकट से जूझ रही है। तेल और गैस की कीमतों पर दबाव बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। IMF की कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट की निदेशक जूली कोजैक ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था ने ऊर्जा कीमतों के झटके के बावजूद मजबूती दिखाई है। उनके मुताबिक भारत की 7.8 फीसदी GDP वृद्धि उम्मीद से बेहतर रही और यह प्रदर्शन बताता है कि देश वैश्विक आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण इंजन बना हुआ है। यानी महंगे ईंधन और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भी भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह कमजोर नहीं हुईं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
सर्विस सेक्टर बना ग्रोथ का बड़ा सहारा
भारत की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर की भूमिका लगातार बढ़ रही है। IMF के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन में सेवाओं की गतिविधियों का बड़ा योगदान रहा। आईटी, बिजनेस सर्विसेज, वित्तीय सेवाएं, कम्युनिकेशन और दूसरे सेवा क्षेत्रों की मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा देती रही है। इसके साथ ही निर्यात में भी मजबूत गतिविधि देखने को मिली।
यही कारण है कि वैश्विक आर्थिक दबाव के बावजूद भारत की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी तक पहुंची। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून 2026 में भारत की वास्तविक GDP करीब ₹81.36 लाख करोड़ रही, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह लगभग ₹75.46 लाख करोड़ थी।
निवेश और घरेलू मांग भी महत्वपूर्ण
भारत की आर्थिक मजबूती केवल निर्यात या सर्विस सेक्टर तक सीमित नहीं है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक FY27 की पहली तिमाही में निवेश गतिविधियों और घरेलू खपत में भी मजबूती दिखाई दी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में निवेश में करीब 11.9 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि घरेलू खपत 7.1 फीसदी बढ़ी। वहीं निर्यात में करीब 12 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
इसका मतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था को घरेलू मांग, निवेश और बाहरी मांग—तीनों तरफ से समर्थन मिला। यही वजह है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भी भारत की ग्रोथ की रफ्तार कई अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में मजबूत बनी हुई है।
IMF ने GDP आंकड़ों में बदलाव का भी स्वागत किया
भारत की मजबूत GDP ग्रोथ के साथ देश की आर्थिक गणना प्रणाली भी चर्चा में है। IMF ने भारत में GDP से जुड़े आंकड़ों और आर्थिक गतिविधियों को मापने के लिए किए जा रहे बदलावों का स्वागत किया है। भारत ने राष्ट्रीय आय के आंकड़ों की गणना में नई पद्धतियों और बेहतर डेटा स्रोतों को शामिल किया है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों से अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। हालांकि GDP के 7.8 फीसदी आंकड़े को लेकर कुछ अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों ने सवाल भी उठाए हैं। कुछ विशेषज्ञों ने पिछले साल के आंकड़ों में संशोधन और नई गणना पद्धति के प्रभाव को लेकर चर्चा की है। दूसरी ओर, सरकारी पक्ष और IMF ने आंकड़ों को बेहतर बनाने की दिशा में किए गए बदलावों का समर्थन किया है।
आगे भी बनी रहेंगी चुनौतियां
हालांकि 7.8 फीसदी GDP ग्रोथ भारत के लिए अच्छी खबर है, लेकिन वैश्विक आर्थिक चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। IMF ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा संकट को लेकर जोखिम अभी बना हुआ है। तेल और गैस की ऊंची कीमतें भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए हमेशा चिंता का विषय रहती हैं। यदि लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं, तो इससे आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा वैश्विक व्यापार, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में आने वाले बदलाव भी भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।
दुनिया के लिए क्यों अहम है भारत की ग्रोथ?
भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ने वाले देशों में शामिल है। ऐसे में भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि का असर केवल देश के भीतर ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। तेजी से बढ़ती घरेलू खपत, मजबूत सर्विस सेक्टर, बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम, निवेश और निर्यात भारत को वैश्विक कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बनाते हैं।
IMF का भारत को 'दुनिया का प्रमुख ग्रोथ इंजन' बताना इसी व्यापक आर्थिक भूमिका की ओर संकेत करता है। 7.8 फीसदी की तिमाही GDP वृद्धि ने यह भी दिखाया है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में फिलहाल मजबूत गति बनी हुई है।
Source: Bhaskar


