स्कूलों में Burqa-Niqab नहीं! PM मोदी की मित्र Meloni ने इटली में उठाया बड़ा कदम
इटली की PM Giorgia Meloni ने स्कूलों में Burqa और Niqab पर रोक लगाने की योजना पेश की है। जानिए PM Modi की मित्र Meloni के प्रस्ताव में और क्या-क्या है।

Italy PM Giorgia Meloni announces plan to ban burqa and niqab in schools
इटली
1:32 PM, Sep 22, 2026
O News हिंदी Desk
इटली के स्कूलों में बुर्का-नकाब पर रोक की तैयारी, PM मोदी की मित्र जॉर्जिया मेलोनी का बड़ा फैसला
रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने एक बार फिर ऐसा फैसला आगे बढ़ाया है, जिसने यूरोप में संस्कृति, शिक्षा और प्रवासी समुदायों के एकीकरण को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मेलोनी सरकार स्कूलों में बुर्का और नकाब जैसे चेहरा ढकने वाले परिधानों पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही एक कक्षा में विदेशी छात्रों की संख्या की अधिकतम सीमा तय करने और गंभीर एकीकरण संबंधी कठिनाइयों से जूझ रहे विदेशी छात्रों के अभिभावकों के लिए इतालवी भाषा सीखने की व्यवस्था का भी प्रस्ताव है।
“स्कूल जाना है तो चेहरा खुला होना चाहिए”
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपनी पार्टी Brothers of Italy की युवा इकाई के एक कार्यक्रम में इस प्रस्ताव की जानकारी दी। उनका कहना था कि स्कूल ऐसी जगह है, जहां बच्चों को एक-दूसरे के साथ घुलने-मिलने, भाषा सीखने और देश के सामाजिक जीवन का हिस्सा बनने का अवसर मिलता है।
मेलोनी ने साफ शब्दों में कहा कि स्कूल में चेहरा खुला होना चाहिए। उनके मुताबिक किसी वास्तविक या कथित परंपरा के नाम पर किसी युवती को अपना चेहरा छिपाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। प्रस्ताव में खास तौर पर बुर्का और नकाब का उल्लेख है; उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मेलोनी ने हिजाब को इस घोषणा में शामिल नहीं किया।
सिर्फ बुर्का-नकाब नहीं, विदेशी छात्रों को लेकर भी बड़ा प्रस्ताव
मेलोनी सरकार की योजना केवल पहनावे तक सीमित नहीं है। प्रस्ताव में एक कक्षा में विदेशी छात्रों की अधिकतम संख्या कानूनी रूप से तय करने की बात भी शामिल है। हालांकि यह सीमा कितनी होगी, इसका अभी खुलासा नहीं किया गया है।
मेलोनी का तर्क है कि यदि किसी कक्षा में एक बच्चा इतालवी भाषा नहीं समझता, तो शिक्षक और दूसरे छात्रों की मदद से उसके लिए भाषा सीखना और समाज में घुलना-मिलना आसान हो सकता है। लेकिन यदि भाषा न समझने वाले छात्रों की संख्या बहुत अधिक हो जाए, तो एकीकरण की प्रक्रिया मुश्किल हो जाती है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार इटली के स्कूलों में गैर-इतालवी नागरिक छात्रों की हिस्सेदारी करीब 11.6 प्रतिशत है।
मेलोनी का संदेश—इटली में भविष्य बनाना है तो भाषा और नियमों से जुड़ना होगा
इस पूरी पहल के केंद्र में मेलोनी सरकार “integration” यानी एकीकरण को रख रही है। सरकार का रुख है कि दूसरे देशों से इटली आने वाले परिवार देश की भाषा सीखें और वहां की सामाजिक व्यवस्था के साथ जुड़ें।
समर्थकों की नजर में यह कदम स्कूलों में समान नियम, पहचान और बेहतर सामाजिक एकीकरण की दिशा में उठाया गया कदम है। वहीं आलोचकों के बीच धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर बहस होना स्वाभाविक है। फिलहाल यह महत्वपूर्ण है कि यह एक प्रस्तावित सरकारी उपाय है; इसे लागू कानून मान लेना अभी जल्दबाजी होगी। सरकार की मंजूरी के बाद संसदीय प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।
PM मोदी की मित्र हैं जॉर्जिया मेलोनी
भारत के नजरिए से जॉर्जिया मेलोनी की चर्चा इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मेलोनी के बीच पिछले कुछ वर्षों में काफी गर्मजोशी भरे संबंध देखने को मिले हैं।
यह केवल सोशल मीडिया की चर्चा नहीं है। 4 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को इटली के युद्धोत्तर इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार पद पर रहने वाली प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देते हुए उन्हें सार्वजनिक रूप से “my friend Prime Minister Meloni” कहा था। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि मेलोनी की मित्रता ने भारत-इटली संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इससे कुछ महीने पहले मई 2026 में मोदी और मेलोनी की रोम में हुई बैठक के दौरान भारत और इटली ने अपने रिश्तों को Special Strategic Partnership के स्तर तक ले जाने का निर्णय किया था। दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, AI, ऊर्जा, शिक्षा और संस्कृति सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
Giorgia Meloni Modi
अपने राजनीतिक एजेंडे पर मजबूती से आगे बढ़ रहीं मेलोनी
जॉर्जिया मेलोनी की राजनीति में राष्ट्रीय पहचान, आप्रवासन और सामाजिक एकीकरण लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक का प्रस्ताव भी इसी व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
इस प्रस्ताव के समर्थकों के लिए सवाल धार्मिक पहचान को खत्म करने का नहीं, बल्कि स्कूल जैसी सार्वजनिक संस्था में चेहरा खुला रखने, संवाद आसान बनाने और सभी विद्यार्थियों के लिए समान नियम लागू करने का है। दूसरी तरफ, इसके आलोचक यह सवाल उठा सकते हैं कि राज्य को व्यक्तिगत धार्मिक पहनावे में कितनी दखल देनी चाहिए।
यही कारण है कि मेलोनी का नया कदम केवल इटली तक सीमित मुद्दा नहीं रहने वाला। यूरोप में आप्रवासन, धार्मिक स्वतंत्रता, महिलाओं के अधिकार और राष्ट्रीय पहचान को लेकर पहले से जारी बहस में यह प्रस्ताव एक नया अध्याय जोड़ सकता है।
अब आगे क्या?
फिलहाल स्कूलों में बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है। मेलोनी ने कहा है कि संबंधित उपाय को कैबिनेट के सामने लाया जाएगा। इसके बाद इसे कानूनी रूप देने के लिए आवश्यक संसदीय प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसलिए इस खबर को “इटली ने बुर्का-नकाब पर प्रतिबंध लगा दिया” कहने के बजाय “मेलोनी सरकार प्रतिबंध लगाने की तैयारी में” कहना अधिक तथ्यात्मक होगा।
मेलोनी सरकार ने अपने इस कदम के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि इटली में शिक्षा के साथ भाषा और सामाजिक एकीकरण को भी वह प्राथमिकता देना चाहती है। आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव पर इटली की संसद और यूरोप की राजनीति में कैसी प्रतिक्रिया होती है, उस पर निगाह रहेगी।
Source: Aljazeera


