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बड़ी खबर/न्यूज़/the one whom the world thought was a victim turned out to be a fugitive from life imprisonment the horrifying truth of ex muslim salim vastik came to light

जिसे 'पीड़ित' समझ रही थी दुनिया, वो निकला उम्रकैद का भगोड़ा; एक्स-मुस्लिम सलीम वास्तिक का खौफनाक सच आया सामने

"गाजियाबाद के चर्चित एक्स-मुस्लिम यूट्यूबर सलीम वास्तिक का सनसनीखेज सच आया सामने। 1995 के संदीप बंसल हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट चुका सलीम 25 साल से फरार था। दिल्ली पुलिस ने फिंगरप्रिंट और पुरानी तस्वीरों की मदद से उसे गिरफ्तार कर लिया है। जानिए कैसे पहचान बदलकर छिपा रहा यह खूंखार हत्यारा।"

जिसे 'पीड़ित' समझ रही थी दुनिया, वो निकला उम्रकैद का भगोड़ा; एक्स-मुस्लिम सलीम वास्तिक का खौफनाक सच आया सामने

एक्स-मुस्लिम सलीम वास्तिक का खौफनाक सच

delhi

12:11 PM, Apr 25, 2026

O News हिंदी Desk

एक्स-मुस्लिम यूट्यूबर सलीम वास्तिक का सनसनीखेज सच: 25 साल बाद खुला हत्या का राज, दिल्ली पुलिस ने दबोचा

नई दिल्ली/गाजियाबाद: कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराधी चाहे पाताल में भी छिप जाए, एक न एक दिन वह गिरफ्त में आ ही जाता है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हाल ही में 'एक्स-मुस्लिम' (Ex-Muslim) पहचान को लेकर चर्चा में रहे यूट्यूबर सलीम वास्तिक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जिस व्यक्ति की हत्या की कोशिश की खबर ने कुछ महीने पहले सनसनी मचाई थी, आज वही व्यक्ति दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में है।

जांच में जो खुलासा हुआ है, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। सलीम वास्तिक असल में एक खूंखार हत्यारा निकला, जो पिछले 25 सालों से दिल्ली पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था।

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क्या है पूरा मामला? (The Background)

शनिवार, 25 अप्रैल 2026 की सुबह दिल्ली पुलिस की एक विशेष टीम गाजियाबाद के लोनी इलाके में पहुंची। यहाँ से पुलिस ने सलीम वास्तिक को गिरफ्तार किया। गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ के अनुसार, सलीम वास्तिक कोई साधारण सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नहीं, बल्कि संदीप बंसल हत्याकांड का मुख्य दोषी है।

1995 का वह काला दिन

मामले की जड़ें साल 1995 में दफन हैं। 20 जनवरी 1995 को दिल्ली के एक बड़े कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे, संदीप बंसल का अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ताओं ने मोटी फिरौती (रंगदारी) की मांग की थी। जब मांग पूरी नहीं हुई, तो निर्दयी अपहरणकर्ताओं ने मासूम संदीप की हत्या कर दी। इस मामले में सलीम (तत्कालीन सलीम खान) को मुख्य आरोपी बनाया गया था।

उम्रकैद से लेकर फरार होने तक का सफर

  1. 1997: दिल्ली की अदालत ने सलीम को संदीप बंसल की हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
  2. 2000: सलीम को कोर्ट से जमानत मिली। जेल से बाहर आते ही वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया।
  3. फरारी के 25 साल: पिछले ढाई दशकों से सलीम अपनी पहचान बदलकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ और अंततः गाजियाबाद में छिपा रहा।
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खुद को 'मृत' घोषित कर बनाई नई पहचान

सलीम वास्तिक इतना शातिर था कि उसने खुद को कागजों पर 'मृत' घोषित करवा दिया था ताकि पुलिस उसकी तलाश बंद कर दे। उसने अपना नाम सलीम खान से बदलकर सलीम अहमद रख लिया। समय के साथ उसने अपनी एक नई छवि गढ़ी—'सलीम वास्तिक'।

उसने लोनी में अलमारी बनाने का काम शुरू किया और बाद में कपड़ों की दुकान खोली। लेकिन उसकी महत्वाकांक्षा उसे डिजिटल दुनिया में ले आई। उसने 'एक्स-मुस्लिम' (इस्लाम छोड़ने वाला) बनकर यूट्यूब पर वीडियो डालना शुरू किया। देखते ही देखते वह देशभर में चर्चित हो गया।

विडंबना देखिए: जिस सोशल मीडिया की प्रसिद्धि ने उसे सुरक्षा और पहचान दिलाई, उसी प्रसिद्धि ने उसे पुलिस के रडार पर भी ला खड़ा किया।

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कैसे हुई गिरफ्तारी? (The Investigation)

दिल्ली पुलिस की टीम, जिसकी अगुवाई इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी कर रहे थे और जिसकी देखरेख एसीपी संजय कुमार नागपाल कर रहे थे, लंबे समय से 'मोस्ट वांटेड' अपराधियों की फाइलों को खंगाल रही थी।

  1. गुप्त सूचना: हेड कॉन्स्टेबल मिंटू यादव को एक मुखबिर से पुख्ता जानकारी मिली कि यूट्यूब पर दिखने वाला सलीम वास्तिक ही 1995 का फरार हत्यारा सलीम खान हो सकता है।
  2. टेक्निकल जांच: पुलिस ने पुरानी फाइलों से सलीम के फिंगरप्रिंट्स और 25 साल पुरानी तस्वीरों को निकाला।
  3. आधुनिक तकनीक का सहारा: फेस रिकग्निशन और फिंगरप्रिंट मिलान के बाद यह पक्का हो गया कि यूट्यूबर की दाढ़ी और बदले हुए चेहरे के पीछे वही हत्यारा छिपा है।
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फरवरी 2026 का जानलेवा हमला: असली टर्निंग पॉइंट

सलीम वास्तिक पहली बार चर्चा में तब आया जब फरवरी 2026 में लोनी स्थित उसके ऑफिस में उस पर जानलेवा हमला हुआ। हमलावरों ने उसका गला रेत दिया था और पेट पर चाकू से कई वार किए थे। उस वक्त वह 'विक्टिम' (पीड़ित) के रूप में उभरा था।

उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने सक्रियता दिखाते हुए उसके दोनों हमलावरों को अलग-अलग मुठभेड़ों में ढेर कर दिया था। उस समय किसी को अंदेशा नहीं था कि जिस व्यक्ति के लिए पुलिस जान की बाजी लगा रही है, वह खुद एक सजायाफ्ता मुजरिम है।

Video Courtesy (ANI) X

क्या था सलीम वास्तिक का 'यूट्यूब' एजेंडा?

सलीम वास्तिक यूट्यूब पर एक 'तार्किक' और 'धर्म सुधारक' के रूप में खुद को पेश करता था। वह अक्सर इस्लाम की रूढ़ियों पर प्रहार करता था, जिससे उसे एक खास वर्ग का समर्थन और सुरक्षा मिली हुई थी। जानकारों का मानना है कि उसने यह 'एक्स-मुस्लिम' वाली छवि शायद इसलिए अपनाई ताकि वह समाज में एक अलग पहचान बना सके और लोग उसके आपराधिक अतीत की ओर देखने की हिम्मत न करें।

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निष्कर्ष: कानून का इंसाफ

सलीम वास्तिक की गिरफ्तारी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि "अपराध कभी मरता नहीं है।" 13 साल के संदीप बंसल के परिवार को 31 साल बाद (1995 से 2026) असली न्याय मिला है। 25 साल तक पुलिस को छकाने वाला यह अपराधी अब फिर से जेल की सलाखों के पीछे होगा, जहाँ उसे अपनी उम्रकैद की शेष सजा काटनी होगी।

दिल्ली पुलिस की इस सफलता ने भगोड़े अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश भेजा है कि वे चाहे अपना नाम बदल लें, चेहरा बदल लें या अपनी विचारधारा, उनकी असली पहचान एक न एक दिन उजागर हो ही जाएगी।

Source: Opp India

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