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₹1,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर हो जाएगा आपका खाता फ्रिज? आ गया RBI का नया बैंक अकाउंट नियम

RBI ने साइबर फ्रॉड और Money Mule Accounts पर शिकंजा कसने के लिए नया ड्राफ्ट प्रस्ताव रखा है। संदिग्ध ₹1,000+ ट्रांजैक्शन पर अस्थायी होल्ड और पूरे खाते के डेबिट पर भी रोक लग सकती है। जानिए 60 दिन की सीमा, 20 दिन में जवाब और 1 अप्रैल 2027 से प्रस्तावित नए नियमों की पूरी जानकारी।

₹1,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर हो जाएगा आपका खाता फ्रिज? आ गया RBI का नया बैंक अकाउंट नियम

₹1,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर हो जाएगा आपका खाता फ्रिज? आ गया RBI का नया बैंक अकाउंट नियम

दिल्ली

6:42 PM, Sep 14, 2026

O News हिंदी Desk

अगर आपके बैंक खाते में अचानक कोई संदिग्ध लेन-देन दिखाई देता है, तो आने वाले समय में बैंक उस रकम को अस्थायी रूप से रोक सकता है। इतना ही नहीं, अगर पूरे बैंक खाते के मनी-म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल होने का संदेह मिलता है, तो खाते से डेबिट यानी पैसे निकालने या दूसरे खाते में ट्रांसफर करने पर भी अस्थायी रोक लगाई जा सकती है।

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने साइबर फ्रॉड और मनी-म्यूल अकाउंट से जुड़े मामलों में बैंकों के लिए एक समान प्रक्रिया तय करने वाला Draft KYC Amendment Directions, 2026 जारी किया है। इसका उद्देश्य साइबर अपराध से हासिल रकम को आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर होने से रोकना और संदिग्ध लेन-देन पर तेजी से कार्रवाई करना है। हालांकि अभी यह सिर्फ ड्राफ्ट है और RBI ने आम लोगों समेत सभी संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं।

₹1,000 या उससे ज्यादा के संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर नजर

प्रस्तावित SOP के मुताबिक, अगर बैंक के ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम को ₹1,000 या उससे ज्यादा का कोई लेन-देन साइबर फ्रॉड या मनी-म्यूल गतिविधि से जुड़ा हुआ फ्लैग करता है, तो बैंक उस संदिग्ध रकम पर अस्थायी डेबिट होल्ड लगा सकता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि केवल ₹1,000 का ट्रांजैक्शन होने से अपने आप पैसा फ्रीज नहीं होगा। रकम को बैंक के मॉनिटरिंग सिस्टम में साइबर फ्रॉड या मनी-म्यूल गतिविधि से जुड़ा संदिग्ध फ्लैग मिलना जरूरी होगा। बैंक इसके लिए अपने फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम और AI/ML आधारित मॉनिटरिंग टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

पूरे बैंक खाते पर भी लग सकती है अस्थायी रोक

अगर बैंक को यह संदेह होता है कि पूरा अकाउंट ही साइबर फ्रॉड से जुड़ी रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल हो रहा है, तो केवल किसी एक ट्रांजैक्शन को रोकने के बजाय खाते के डेबिट ऑपरेशन पर भी अस्थायी रोक लगाई जा सकती है। इसका मतलब यह है कि ग्राहक कुछ समय के लिए खाते से पैसा निकालने या किसी दूसरे खाते में रकम ट्रांसफर करने में सक्षम नहीं हो सकता। हालांकि प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद स्थायी रूप से खाता बंद करना नहीं, बल्कि जांच पूरी होने तक संदिग्ध रकम को आगे जाने से रोकना है।

Money Mule Account क्या होता है?

Money Mule Account ऐसा बैंक अकाउंट होता है जिसका इस्तेमाल अपराधियों द्वारा साइबर फ्रॉड, फिशिंग, पहचान की चोरी या दूसरे गैरकानूनी तरीकों से हासिल रकम को प्राप्त करने और फिर उसे दूसरे बैंक खातों में भेजने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारक जानबूझकर अपना बैंक अकाउंट किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए देता है। लेकिन कुछ मामलों में व्यक्ति को यह जानकारी ही नहीं होती कि उसके खाते में आने वाला पैसा किसी साइबर फ्रॉड से जुड़ा है। यही वजह है कि RBI की प्रस्तावित व्यवस्था में संदिग्ध खातों की पहचान, ग्राहक को सूचना देने और उसके जवाब की जांच के लिए एक तय प्रक्रिया रखने पर जोर दिया गया है।

खाते पर होल्ड लगेगा तो ग्राहक को मिलेगी जानकारी

प्रस्तावित नियमों में ग्राहक के हितों का भी ध्यान रखा गया है। अगर बैंक किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन या अकाउंट पर अस्थायी डेबिट होल्ड लगाता है, तो ग्राहक को इसकी जानकारी देनी होगी। नोटिस में होल्ड लगाने का कारण, संबंधित लेन-देन की जानकारी और आगे की प्रक्रिया के बारे में बताया जाना प्रस्तावित है। ग्राहक को अपनी तरफ से स्पष्टीकरण या संबंधित दस्तावेज देने का अवसर भी मिलेगा।

प्रस्तावित SOP के तहत ग्राहक को 20 दिन तक अपना जवाब देने का समय मिल सकता है। इसके बाद बैंक को ग्राहक के स्पष्टीकरण और उपलब्ध जानकारी की जांच करनी होगी। अगर बैंक को लगता है कि रोक हटाई जा सकती है तो होल्ड हटाया जा सकता है। वहीं, अगर मामला गंभीर पाया जाता है तो आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

अधिकतम 60 दिन तक रह सकती है अस्थायी डेबिट होल्ड

RBI के ड्राफ्ट में अस्थायी डेबिट होल्ड की अवधि को लेकर भी एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव है। सामान्य स्थिति में, यदि किसी कानून प्रवर्तन एजेंसी या सक्षम प्राधिकारी की ओर से अलग निर्देश नहीं है, तो ऐसी अस्थायी रोक अधिकतम 60 दिन तक रह सकती है। इससे पहले कई मामलों में बैंक अकाउंट फ्रीज होने के बाद ग्राहकों को लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। RBI की प्रस्तावित SOP का उद्देश्य इसी तरह के मामलों में एक समयबद्ध और समान प्रक्रिया तैयार करना है।

RBI के ड्राफ्ट के पीछे सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

यह प्रस्ताव अचानक नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2026 में साइबर फ्रॉड और मनी-म्यूल अकाउंट से जुड़े मामलों में कार्रवाई के लिए RBI को एक Standard Operating Procedure तैयार करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने साइबर फ्रॉड के मामलों में फ्रीज किए गए बैंक खातों से जुड़ी शिकायतों के जल्द निपटारे और ठगी की रकम की रिकवरी को तेज करने पर भी जोर दिया था। इसके बाद RBI ने बैंकों के लिए एक समान प्रक्रिया वाला ड्राफ्ट तैयार किया।

2 अक्टूबर तक दे सकते हैं सुझाव

अभी RBI का यह फैसला अंतिम नियम नहीं है। केंद्रीय बैंक ने Draft KYC Amendment Directions, 2026 पर आम लोगों, बैंकों और दूसरे संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। RBI के मुताबिक, सुझाव 2 अक्टूबर 2026 तक भेजे जा सकते हैं। प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद अंतिम निर्देश जारी किए जाएंगे।

1 अप्रैल 2027 से लागू होने का प्रस्ताव

ड्राफ्ट के अनुसार प्रस्तावित नए निर्देश 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने हैं। हालांकि किसी बैंक को इससे पहले भी SOP लागू करने की अनुमति हो सकती है। इसका मतलब है कि अभी ग्राहकों के लिए कोई नया अंतिम नियम लागू नहीं हुआ है। इसलिए केवल इस ड्राफ्ट के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि हर संदिग्ध ₹1,000 के ट्रांजैक्शन पर तुरंत बैंक अकाउंट फ्रीज हो जाएगा।

ग्राहकों के लिए क्या जरूरी है?

बैंक अकाउंट को मनी-म्यूल गतिविधियों से बचाने के लिए ग्राहकों को अपना ATM कार्ड, नेट बैंकिंग, UPI या बैंक अकाउंट किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए नहीं देना चाहिए। अनजान व्यक्ति से पैसा लेकर आगे किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर करना भी जोखिम भरा हो सकता है। अगर आपके खाते में अनजान स्रोत से पैसा आता है, तो उसे बिना जांच के आगे भेजने के बजाय तुरंत अपने बैंक से संपर्क करना बेहतर है।

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