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बड़ी खबर/न्यूज़/himanta biswa sarma s direct challenge to owaisi arrest me but there is no compromise on the security of assam

हिमंत बिस्वा सरमा की ओवैसी को सीधी चुनौती: "मुझे गिरफ्तार करो, पर असम की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं"

"असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की कानूनी शिकायत पर बेबाक जवाब दिया है। सरमा ने कहा कि वे जेल जाने के लिए तैयार हैं लेकिन बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ उनका रुख नहीं बदलेगा। जानें वीडियो विवाद से लेकर 'पॉइंट-ब्लैंक शॉट' कैप्शन तक की पूरी कहानी और असम की राजनीति में उपजा यह नया तूफान।"

हिमंत बिस्वा सरमा की ओवैसी को सीधी चुनौती: "मुझे गिरफ्तार करो, पर असम की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं"

हिमंत बिस्वा सरमा की ओवैसी को सीधी चुनौती

असम

7:05 PM, Feb 9, 2026

O News हिंदी Desk

ओवैसी की चुनौती और हिमंत का 'हुंकार': "गिरफ्तार होना मंजूर, पर घुसपैठियों पर समझौता नहीं"

गुवाहाटी/हैदराबाद: भारतीय राजनीति के दो ध्रुव—एक तरफ पूर्वोत्तर में भाजपा के चाणक्य माने जाने वाले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और दूसरी तरफ हैदराबाद से अपनी राजनीति की बिसात बिछाने वाले असदुद्दीन ओवैसी—एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस बार विवाद कानूनी शिकायतों तक जा पहुंचा है, लेकिन असम के मुख्यमंत्री के तेवर बता रहे हैं कि वे पीछे हटने वाले नेताओं में से नहीं हैं।

डिब्रूगढ़ में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने जिस बेबाकी से ओवैसी की कानूनी धमकियों का जवाब दिया, उसने न केवल सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरी हैं, बल्कि देश के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।

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क्या है पूरा विवाद? (पॉइंट-ब्लैंक शॉट और डिलीटेड वीडियो)

विवाद की जड़ भाजपा असम इकाई के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से साझा किया गया एक वीडियो है। हालांकि, यह वीडियो अब हटाया जा चुका है, लेकिन इसके 'कैप्शन' और 'प्रस्तुतीकरण' को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने तीखा विरोध दर्ज कराया।

  1. आपत्तिजनक कैप्शन: ओवैसी का आरोप है कि वीडियो में प्रतीकात्मक कार्रवाई के साथ "पॉइंट-ब्लैंक शॉट" (Point-Blank Shot) जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।
  2. सांप्रदायिक रंग का आरोप: ओवैसी ने दावा किया कि यह वीडियो जानबूझकर मुसलमानों और उनके धर्म के प्रति नफरत भड़काने और एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने के लिए बनाया गया था।
  3. पुलिस में शिकायत: इसी आधार पर ओवैसी और उनके सहयोगियों ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की।
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हिमंत बिस्वा सरमा का दो टूक जवाब: "जेल जाने से डर नहीं लगता"

आमतौर पर जब किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग होती है, तो रक्षात्मक बयान आते हैं। लेकिन हिमंत बिस्वा सरमा ने आक्रमण को ही सबसे अच्छा बचाव माना। उन्होंने सीधे तौर पर ओवैसी को चुनौती देते हुए कहा:

"अगर उन्होंने मेरे खिलाफ केस किया है, तो मुझे गिरफ्तार कर लें। मुझे कोई आपत्ति नहीं है। मैं जेल जाने के लिए तैयार हूं। मुझे उस वीडियो के बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन मैं डरने वाला नहीं हूं।"

सरमा का यह बयान सोशल मीडिया पर "बेखौफ नेतृत्व" के तौर पर ट्रेंड कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया है कि वे कानूनी प्रक्रियाओं को अपनी विचारधारा के आड़े नहीं आने देंगे।

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घुसपैठ का मुद्दा: विचारधारा पर अडिग मुख्यमंत्री

विवाद चाहे वीडियो पर शुरू हुआ हो, लेकिन हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे फिर से अपने मूल एजेंडे यानी 'अवैध घुसपैठ' की तरफ मोड़ दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओवैसी की शिकायतें उन्हें उनके रास्ते से नहीं भटका सकतीं।

उनके संबोधन के प्रमुख बिंदु:

  1. घुसपैठियों के खिलाफ जंग जारी: "मैं बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ हूं और आगे भी रहूंगा। मेरा यह रुख कभी नहीं बदलेगा।"
  2. राज्य की सुरक्षा सर्वोपरि: उन्होंने दोहराया कि असम के संसाधनों, यहां की पहचान और भूमि अधिकारों की रक्षा करना उनकी प्राथमिकता है।
  3. दबाव की राजनीति विफल: उन्होंने साफ किया कि कोई भी कानूनी धमकी या बाहरी दबाव उन्हें असम की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समझौता करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
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ओवैसी बनाम सरमा: विचारधाराओं का टकराव

यह पहली बार नहीं है जब ये दोनों नेता आपस में भिड़े हों। असदुद्दीन ओवैसी अक्सर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर ध्रुवीकरण का आरोप लगाते हैं, वहीं हिमंत बिस्वा सरमा ओवैसी को "विभाजनकारी राजनीति" का चेहरा बताते रहे हैं।

इस बार ओवैसी का तर्क है कि भाजपा सत्ता का दुरुपयोग कर नफरत फैला रही है। वहीं, हिमंत बिस्वा सरमा का तर्क है कि वे केवल असम के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं और घुसपैठियों को बाहर करने का संकल्प ले चुके हैं।

तालिका: विवाद के मुख्य पक्ष

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राजनीतिक विश्लेषण: क्या होगा इसका असर?

इस पूरे घटनाक्रम ने असम की राजनीति में हिमंत बिस्वा सरमा की छवि को एक 'कठोर और स्पष्टवादी' नेता के रूप में और मजबूत किया है। उनके समर्थकों का मानना है कि वे एकमात्र ऐसे नेता हैं जो ओवैसी जैसे विरोधियों को उनकी भाषा में जवाब देते हैं।

दूसरी ओर, इस विवाद से ओवैसी को भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात रखने का मौका मिला है। हालांकि, कानूनी तौर पर यह मामला कितना आगे बढ़ेगा, यह पुलिस जांच पर निर्भर करता है। लेकिन राजनीतिक तौर पर, सरमा ने "पॉइंट-ब्लैंक" जवाब देकर गेंद ओवैसी के पाले में डाल दी है।

Video :- India Today NE

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निष्कर्ष: क्या यह ध्रुवीकरण है या सुरक्षा का संकल्प?

असम की राजनीति हमेशा से 'अवैध घुसपैठ' और 'स्वदेशी पहचान' के इर्द-गिर्द घूमती रही है। हिमंत बिस्वा सरमा बखूबी जानते हैं कि उनका आधार क्या है। ओवैसी की शिकायत पर उनकी यह टिप्पणी कि "गिरफ्तार करना है तो कर लो", उनकी इसी राजनीतिक समझ का हिस्सा है। वे यह दिखाना चाहते हैं कि वे असम के हितों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पुलिस ओवैसी की शिकायत पर कोई ठोस कदम उठाती है, या यह महज एक और राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएगा। लेकिन एक बात साफ है—हिमंत बिस्वा सरमा ने झुकने के बजाय 'लड़ने' का विकल्प चुनकर अपनी राजनीति की दिशा तय कर दी है।

Source: Onewshindi

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