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लोकतंत्र शर्मसार! क्या पीएम मोदी पर हमले की फिराक में था विपक्ष? महिला सांसदों को 'ढाल' बनाने के खुलासे से मची खलबली

"संसद में PM मोदी पर हमले की साजिश का बड़ा खुलासा! लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने महिला सांसदों को ढाल बनाकर पीएम को घेरने की योजना बनाई थी। जानिए क्यों 22 साल बाद बिना पीएम के भाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पास हुआ और बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने विपक्ष पर क्या गंभीर आरोप लगाए।"

लोकतंत्र शर्मसार! क्या पीएम मोदी पर हमले की फिराक में था विपक्ष? महिला सांसदों को 'ढाल' बनाने के खुलासे से मची खलबली

पीएम मोदी पर हमले की फिराक में था विपक्ष?

delhi

2:40 PM, Feb 5, 2026

O News हिंदी Desk

लोकतंत्र के मंदिर में 'शर्मनाक' साजिश: क्या पीएम मोदी पर हमले की तैयारी में था विपक्ष? महिला सांसदों को 'ढाल' बनाने के दावों ने मचाया हड़कंप

नई दिल्ली: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में बजट सत्र का सातवां दिन एक ऐसे काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है, जिसने संसदीय मर्यादाओं को तार-तार कर दिया है। 22 साल में पहली बार ऐसा हुआ जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव बिना प्रधानमंत्री के भाषण के ही ध्वनिमत से पास करना पड़ा। लेकिन इसके पीछे की वजह जो सामने आ रही है, वह किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए डराने वाली है।

लोकसभा सचिवालय के सूत्रों और सत्ता पक्ष के दावों की मानें तो, कांग्रेस और विपक्षी दलों ने संसद के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 'शारीरिक हमले' की एक सोची-समझी साजिश रची थी।

22 साल का रिकॉर्ड टूटा, पर क्यों?

संसदीय परंपरा रही है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद प्रधानमंत्री विस्तार से चर्चा का जवाब देते हैं। लेकिन इस बार सदन में जो माहौल था, वह चर्चा का नहीं बल्कि 'हिंसा' की आशंका का था। सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री सदन में मौजूद थे और अपना भाषण देने के लिए पूरी तरह तैयार थे, लेकिन सुरक्षा इनपुट और विपक्ष के आक्रामक तेवरों को देखते हुए स्पीकर को सदन की कार्यवाही स्थगित करने और बिना भाषण के प्रस्ताव पास करने का कड़ा निर्णय लेना पड़ा।

महिला सांसदों को बनाया गया 'हथियार'

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे विवादास्पद और निंदनीय पहलू 'महिला सांसदों' का इस्तेमाल है। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी सहित कई अन्य नेताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि कांग्रेस ने अपनी इस कथित साजिश को अंजाम देने के लिए महिला सांसदों को एक 'सुरक्षा कवच' (Shield) के रूप में आगे किया था।

साजिश का ब्लूप्रिंट क्या था?

  1. सूत्रों के अनुसार, योजना यह थी कि जैसे ही पीएम मोदी भाषण के लिए खड़े होंगे, विपक्षी महिला सांसद उनकी कुर्सी को चारों तरफ से घेर लेंगी।
  2. महिला सांसदों को आगे रखने का मकसद सुरक्षाकर्मियों (Marshals) को असहाय बनाना था, क्योंकि महिलाओं के साथ सख्ती बरतने पर 'स्त्री अस्मिता' का कार्ड खेला जा सकता था।
  3. कहा जा रहा है कि इस घेराबंदी की आड़ में पीएम पर शारीरिक हमला करने या उनके साथ धक्का-मुक्की करने की तैयारी थी।

विकास की राजनीति बनाम विनाश की हताशा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जिस तरह वैश्विक पटल पर उभर रहा है और हालिया बजट में जिस तरह अंत्योदय की बात की गई है, उससे विपक्ष पूरी तरह दिशाहीन नजर आ रहा है। जब तर्कों की कसौटी पर विपक्ष मोदी सरकार को नहीं घेर पाया, तो क्या अब वह 'सड़क वाली हिंसा' को सदन के भीतर लाने पर उतारू है?

मनोज तिवारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "ये लोग हमले के इरादे से ही संसद में आए थे। जब वे जनता के बीच पीएम मोदी का मुकाबला नहीं कर पा रहे, तो अब वे उनके शारीरिक नुकसान की साजिश रच रहे हैं। यह लोकतंत्र की हत्या की कोशिश है।"

सचिवालय की चेतावनी को किया गया नजरअंदाज

खबरों के मुताबिक, लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों ने इस तनावपूर्ण स्थिति को भांपते हुए कई बार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें की थीं। उन्हें समझाने की कोशिश की गई कि संसदीय गरिमा बनाए रखें, लेकिन विपक्ष अपने अड़ियल रवैये पर कायम रहा।

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अब हार की हताशा में इतने डूब चुके हैं कि उन्हें देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा और संसद की मर्यादा का भी ख्याल नहीं रहा?

पीएम मोदी का संयम: देश पहले, भाषण बाद में

प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा 'राष्ट्र प्रथम' की नीति का पालन किया है। सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी भाषण देने के लिए अडिग थे, लेकिन सदन के भीतर किसी भी तरह की अप्रिय घटना या हिंसा से बचने के लिए उन्होंने संयम का परिचय दिया। एक तरफ विपक्ष 'हंगामे और हमले' की राजनीति कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी ने बिना किसी टकराव के संसदीय प्रक्रिया को आगे बढ़ने दिया।

जनता की अदालत में विपक्ष का 'कदाचार'

सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या 'मोहब्बत की दुकान' का असली चेहरा यही है? महिला सांसदों को ढाल बनाकर हिंसा की साजिश रचना न केवल राजनीतिक पतन है, बल्कि महिलाओं का भी अपमान है।

इस घटना से निकले कुछ बड़े सवाल:

  1. क्या अब संसद में भी प्रधानमंत्री सुरक्षित नहीं हैं?
  2. क्या विपक्ष के पास बहस के लिए मुद्दे खत्म हो गए हैं जो वे शारीरिक हमले पर उतर आए हैं?
  3. महिला सांसदों का राजनीतिक ढाल के रूप में इस्तेमाल करना कितना जायज है?

निष्कर्ष: लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी

बजट सत्र के सातवें दिन जो हुआ, उसने बता दिया है कि मोदी विरोध के नाम पर विपक्ष अब किस हद तक जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करने की यह कथित साजिश न केवल एक व्यक्ति पर हमला है, बल्कि उस जनादेश पर हमला है जिसने उन्हें चुनकर भेजा है।

अब समय आ गया है कि देश की जनता यह तय करे कि उन्हें 'विकासवादी नेतृत्व' चाहिए या ऐसा 'विपक्ष' जो सदन को अखाड़ा बनाने की मंशा रखता हो। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव तो पास हो गया, लेकिन विपक्ष के आचरण ने उनके भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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आपकी राय क्या है? क्या विपक्ष को इस तरह की राजनीति शोभा देती है? हमें कमेंट में जरूर बताएं।

Source: TV9

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