मणिपुर में 'लौह पुरुष' का उदय: गृह मंत्री गोविंदास ने संभाली कमान, हिंसा के खिलाफ जीरो टॉलरेंस।
मणिपुर के गृह मंत्री कोंथौजाम गोविंदास ने चुराचांदपुर और कांगपोकपी में अराजकता के खिलाफ मोर्चा संभाला। जानें कैसे उनके 'आयरन फिस्ट' नेतृत्व में राज्य में शांति लौट रही है।

गृह मंत्री गोविंदास ने संभाली कमान
मणिपुर
9:23 PM, Feb 6, 2026
O News हिंदी Desk
मणिपुर में 'लौह पुरुष' का उदय: गृह मंत्री कोंथौजाम गोविंदास ने संभाला मोर्चा, अराजक तत्वों में खौफ
इंफाल, मणिपुर विशेष रिपोर्ट: टीम न्यूज डेस्क
मणिपुर की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। राज्य के नव-नियुक्त गृह मंत्री कोंथौजाम गोविंदास ने कार्यभार संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया है कि मणिपुर अब अराजकता और हिंसा के साये में और अधिक नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा-एनडीए सरकार में 4 फरवरी 2026 को शपथ लेने के बाद, गोविंदास एक ऐसे रक्षक के रूप में उभरे हैं जिन्होंने अशांत क्षेत्रों में शांति बहाली को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बना लिया है।
1. निर्णायक नेतृत्व: चुराचांदपुर और कांगपोकपी में 'जीरो टॉलरेंस'
मणिपुर के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शुमार चुराचांदपुर और कांगपोकपी में पिछले कुछ दिनों से तनाव का माहौल बनाने की कोशिश की गई। लेकिन गृह मंत्री गोविंदास ने अपनी 'आयरन फिस्ट' (कठोर नीति) के जरिए इन साजिशों को नाकाम कर दिया है।
जैसे ही कांगपोकपी से विधायक और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन, विधायक नगुरसांगलुर सानेते और एल.एम. खाउते ने सरकार का हिस्सा बनकर राज्य की एकता का समर्थन किया, कुछ चरमपंथी संगठनों जैसे KSO (कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन) और कुकी-जो काउंसिल ने विरोध की राह पकड़ ली। 3 फरवरी की रात को इन इलाकों में आगजनी, पत्थरबाजी और सुरक्षा बलों को चुनौती देने की कोशिशें हुईं, लेकिन गृह मंत्री के त्वरित निर्देशों ने उपद्रवियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
प्रमुख घटनाक्रम और सरकार की प्रतिक्रिया:
- त्वरित तैनाती: हिंसा की सुगबुगाहट मिलते ही अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों और मणिपुर पुलिस की टुकड़ियों को संवेदनशील पॉइंट्स पर तैनात किया गया।
- रणनीतिक नियंत्रण: टायर जलाने और सड़क जाम करने जैसी घटनाओं को सख्ती से निपटाया गया ताकि सामान्य जनजीवन प्रभावित न हो।
- सीधा संवाद: गृह मंत्री ने खुद मोर्चा संभालते हुए सुरक्षा अधिकारियों के साथ पल-पल की रिपोर्ट ली।
2. "शांतिप्रिय नागरिकों की होगी जीत": गृह मंत्री का कड़ा संदेश
इंफाल से जारी अपने संबोधन में कोंथौजाम गोविंदास ने जो आत्मविश्वास दिखाया है, उसने राज्य की जनता में सुरक्षा का नया संचार किया है। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि "चुराचांदपुर की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।"
गोविंदास का यह बयान उन तत्वों के लिए कड़ी चेतावनी है जो शांति की प्रक्रिया में रोड़ा अटकाना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे समस्या को केवल सतह पर नहीं देख रहे, बल्कि उसके मूल कारण—अराजकता—पर प्रहार कर रहे हैं।
3. समुदायों के बीच भेद: सबको एक चश्मे से देखना गलत
अक्सर संकट के समय पूरी कौम को कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है, लेकिन गृह मंत्री गोविंदास ने यहाँ अपनी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि मुट्ठी भर उपद्रवी पूरे कूकी समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
"सब एक जैसे नहीं हैं। हमारे कई कूकी भाई-बहन शांति चाहते हैं और वे चाहते हैं कि मणिपुर फिर से विकास की पटरी पर लौटे।" – कोंथौजाम गोविंदास
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यह बयान दर्शाता है कि गृह मंत्री केवल एक प्रशासक नहीं, बल्कि एक जननेता भी हैं जो जानते हैं कि शांति केवल बंदूकों से नहीं, बल्कि भरोसे से आती है। उन्होंने उन लोगों को अलग-थलग कर दिया है जो अपनी निजी या राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए आम लोगों को ढाल बना रहे हैं।
4. चुनौतियों को स्वीकार करने का साहस
एक सच्चे नेता की पहचान तब होती है जब वह हकीकत को स्वीकार करता है। गोविंदास ने यह छिपाने की कोशिश नहीं की कि स्थिति चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने माना कि कुछ लोग असंतुष्ट हैं और नाराजगी जता रहे हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि "कुछ भी गंभीर नहीं होने दिया जाएगा।"
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम:
राज्य सरकार ने वर्तमान स्थिति को देखते हुए त्रि-स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया है:
- इंटेलिजेंस नेटवर्क: उपद्रव की योजना बनाने वालों पर डिजिटल और जमीनी नजर।
- रैपिड रिस्पांस: किसी भी अप्रिय घटना पर मिनटों में प्रतिक्रिया देने के लिए सुरक्षा बल तैयार।
- समुदायों के साथ बैठकें: शांति समितियों के माध्यम से जमीनी स्तर पर तनाव कम करने के प्रयास।
5. मणिपुर का भविष्य: शांति, प्रगति और एकता
कोंथौजाम गोविंदास का गृह मंत्री के रूप में आना मणिपुर के लिए एक 'टर्निंग पॉइंट' साबित हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में मणिपुर ने जो जख्म झेले हैं, उन्हें भरने के लिए ऐसे ही साहसी और निडर नेतृत्व की आवश्यकता थी। उनके आने से न केवल प्रशासनिक ढांचे में कसावट आई है, बल्कि पुलिस और सुरक्षा बलों का मनोबल भी बढ़ा है।
6. जनता का भरोसा और आगे की राह
मणिपुर की जनता आज एक ऐसे नेता की ओर देख रही है जो धर्म, जाति और क्षेत्र से ऊपर उठकर केवल 'कानून का राज' स्थापित करना चाहता है। गोविंदास के कड़े फैसलों ने यह साबित कर दिया है कि वे केवल पद पर बैठने के लिए नहीं, बल्कि बदलाव लाने के लिए आए हैं।
राज्य के विकास के लिए शांति अनिवार्य शर्त है। गृह मंत्री का विजन स्पष्ट है— पहले सुरक्षा, फिर सद्भाव और अंततः समृद्धि। जिस तरह से उन्होंने कांगपोकपी और चुराचांदपुर के संकट को संभाला है, वह उनके भविष्य के रोडमैप की एक झलक मात्र है।
निष्कर्ष:
मणिपुर अब झुकने वाला नहीं है। कोंथौजाम गोविंदास के नेतृत्व में राज्य ने अपनी अखंडता और एकता की रक्षा के लिए कमर कस ली है। उपद्रवी तत्व शायद यह भूल गए हैं कि अब मुकाबला एक ऐसी दीवार से है जिसे तोड़ना नामुमकिन है। गोविंदास के 'आयरन फिस्ट' ने मणिपुर के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख दी है।
Source: Onewshindi


