"मणिपुर में 'तालिबानी' क्रूरता: घुटनों पर बैठकर मांगी जान की भीख, फिर AK-47 से भूना; ऋषिकांत की हत्या
"मणिपुर में मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली घटना: कुकी उग्रवादियों द्वारा मेइतेई युवक ऋषिकांत सिंह की 'तालिबानी' स्टाइल में हत्या। क्या राष्ट्रपति शासन समाप्त होने से पहले यह शांति प्रक्रिया को बाधित करने की बड़ी साजिश है? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।"

मणिपुर में 'तालिबानी' क्रूरता
मणिपुर
6:13 PM, Jan 25, 2026
O News हिंदी Desk
मणिपुर में 'तालिबानी' क्रूरता: क्या शांति की कोशिशों को पटरी से उतारने की है ये बड़ी साजिश?
इंफाल/चुराचांदपुर: मणिपुर में पिछले तीन साल से जारी हिंसा के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया है। काकचिंग खुनौ के 28 वर्षीय मयांग्लमबम ऋषिकांत सिंह की नृशंस हत्या ने न केवल राज्य के सुरक्षा दावों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि हिंसा के इस नए 'पैटर्न' ने सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ा दी है।
रूह कंपा देने वाला वीडियो: क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक भयावह वीडियो में ऋषिकांत को अपने घुटनों के बल बैठकर हाथ जोड़कर जीवन की भीख मांगते देखा गया। लेकिन हथियारबंद हमलावरों (संदिग्ध कुकी उग्रवादियों) का दिल नहीं पसीजा और उन्हें बेहद करीब से AK राइफल से भून दिया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि हत्या का यह तरीका—बंधक बनाना, वीडियो रिकॉर्ड करना, गिड़गिड़ाते हुए पीड़ित को मारना और फिर उसे सार्वजनिक करना—सीधे तौर पर हमास या तालिबान जैसी आतंकी रणनीतियों की याद दिलाता है। इसका मुख्य उद्देश्य केवल हत्या करना नहीं, बल्कि पूरे समाज में मनोवैज्ञानिक डर (Psychological Terror) पैदा करना है।
Rishikant
प्यार की सजा मौत: सरहदों में बंटा मणिपुर
ऋषिकांत का कसूर सिर्फ इतना था कि वह अपनी पत्नी चिंगनुंग हाओकिप (जो कुकी समुदाय से हैं) से मिलने चुराचांदपुर गए थे। एक अंतर्जातीय विवाह, जो समाज में एकता का प्रतीक होना चाहिए था, इस नफरत की आग में एक कमजोरी बन गया।
राजनीतिक अस्थिरता और 'प्रेसिडेंट रूल' का अंत
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मणिपुर में 13 फरवरी, 2026 को राष्ट्रपति शासन (President's Rule) समाप्त होने वाला है और नई भाजपा सरकार के गठन की सुगबुगाहट तेज है। वीडियो में सुनाई देने वाली चेतावनी—"नो पॉपुलर गवर्नमेंट, नो पीस"—साफ इशारा करती है कि यह हत्या राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल होने से रोकने की एक सोची-समझी साजिश हो सकती है।
इन्हें भी पढ़ें
मणिपुर हिंसा: एक नज़र में (May 2023 - Jan 2026)
मणिपुर में संघर्ष की शुरुआत 3 मई, 2023 को हुई थी, जिसने अब तक राज्य को पूरी तरह झकझोर दिया है:
इंसाफ की पुकार: मुआवजे से बड़ा है न्याय
मणिपुर सरकार ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है, लेकिन ऋषिकांत के परिवार ने शव को तब तक स्वीकार करने से मना कर दिया है जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती। मैतेई संगठनों और नागरिक समाज ने इस मामले की जांच NIA (National Investigation Agency) को सौंपने की मांग की है।
निष्कर्ष: अब आगे क्या?
मणिपुर को अब अलग-अलग प्रशासन या हथियारों की नहीं, बल्कि संवाद (Dialogue) की जरूरत है। ऋषिकांत की हत्या यह याद दिलाती है कि जब तक जमीन के विवाद और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मूल कारणों को नहीं सुलझाया जाएगा, तब तक शांति केवल एक सपना बनी रहेगी।
मणिपुर की मिट्टी को और लहू नहीं, बल्कि मरहम की जरूरत है।
Source: O News Hindi


