इन Blood Group वालों के लिए बड़ा खतरा? नई रिसर्च ने खोला लिवर डिजीज का चौंकाने वाला राज!
नई रिसर्च में सामने आया है कि Blood Group A वालों में Autoimmune Liver Disease का खतरा सबसे ज्यादा है। जानें कैसे ब्लड ग्रुप लिवर को प्रभावित करता है और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इन Blood Group वालों के लिए बड़ा खतरा?
दिल्ली
7:54 PM, Nov 29, 2025
O News हिंदी Desk
Blood Group और Liver Disease: रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा, इन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा!
क्या आपका ब्लड ग्रुप आपकी सेहत का भविष्य बता सकता है? यह सवाल सुनने में भले अजीब लगता हो, लेकिन हाल ही में सामने आई एक मेडिकल स्टडी ने इसे काफी हद तक सच साबित किया है। अब तक लोग ब्लड ग्रुप को सिर्फ ब्लड डोनेशन, ट्रांसफ्यूज़न और गर्भावस्था में प्रासंगिक मानते थे, लेकिन नई रिसर्च ने खुलासा किया है कि यह हमारे शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया, इंफ्लेमेशन और कई बीमारियों के जोखिम को भी प्रभावित कर सकता है—खासकर लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों को।
ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ब्लड ग्रुप्स में Autoimmune Liver Disease का खतरा दूसरों की तुलना में काफी ज्यादा पाया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि ब्लड ग्रुप A वाले लोग इस बीमारी के जोखिम में सबसे ऊपर हैं। यह खुलासा ‘Frontiers’ जर्नल में प्रकाशित एक महत्वपूर्ण शोध के बाद सामने आया है।
रिसर्च में क्या निकला? ब्लड ग्रुप A वालों को सबसे ज्यादा खतरा
टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस स्टडी के लिए शोधकर्ताओं ने 1200 से अधिक व्यक्तियों का मेडिकल डाटा विश्लेषित किया। इनमें से 114 मरीज ऑटोइम्यून लिवर डिजीज से पीड़ित थे। गहन विश्लेषण के बाद विशेषज्ञों ने पाया कि:
- ब्लड ग्रुप A वाले लोगों में ऑटोइम्यून लिवर डिजीज का खतरा सबसे अधिक था।
- इसके बाद क्रम में O, फिर B, और अंत में AB ग्रुप वाले लोग आते हैं।
- वहीं, ब्लड ग्रुप B वालों में इस बीमारी का रिस्क सबसे कम पाया गया।
यह निष्कर्ष इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक डॉक्टर ब्लड ग्रुप को लिवर डिजीज के जोखिम से उतना नहीं जोड़ते थे, लेकिन यह स्टडी इस क्षेत्र में नई दिशा की ओर इशारा करती है।
ऑटोइम्यून लिवर डिजीज क्या होती है? जानिए आसान भाषा में
आम तौर पर लिवर बीमारियों का कारण शराब, वायरल हेपेटाइटिस, फैटी लिवर, गलत खान-पान या जीवनशैली माना जाता है। लेकिन ऑटोइम्यून लिवर डिजीज एक बिल्कुल अलग स्थिति है।
यह बीमारी तब होती है जब शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से खुद ही अपने लिवर पर हमला करने लगती है। यानी जहाँ इम्यून सिस्टम को वायरस और बैक्टीरिया से शरीर की रक्षा करनी चाहिए, वहीं यह गलती से स्वस्थ लिवर सेल्स को ही नुकसान पहुंचाने लगती है।
ऑटोइम्यून लिवर डिजीज दो मुख्य प्रकार की होती है:
1. Autoimmune Hepatitis (AIH)
- इसमें इम्यून सिस्टम सीधे लिवर कोशिकाओं को नष्ट करना शुरू कर देता है।
- समय पर इलाज न हो तो यह लिवर सिरोसिस तक बढ़ सकता है।
2. Primary Biliary Cholangitis (PBC)
- इसमें इम्यून सिस्टम बाइल डक्ट्स को नुकसान पहुंचाता है।
- बाइल जमा होने लगता है, जिससे धीरे-धीरे लिवर में सूजन, स्कारिंग और अंत में लिवर फेलियर भी हो सकता है।
इन बीमारियों की सबसे खतरनाक बात यह है कि ये कई सालों तक बिना लक्षणों के बढ़ती रहती हैं।
ब्लड ग्रुप और लिवर डिजीज का कनेक्शन कैसे बनता है?
अब सवाल उठता है—आखिर ब्लड ग्रुप से लिवर डिजीज का रिस्क कैसे बढ़ सकता है?
दरअसल हमारा ब्लड ग्रुप इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) पर कौन से एंटीजन मौजूद हैं—A, B या H। यही एंटीजन न सिर्फ ब्लड ग्रुप तय करते हैं, बल्कि वे इम्यून सिस्टम और इंफ्लेमेशन को भी प्रभावित कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि:
- A एंटीजन की मौजूदगी, इम्यून सिस्टम में एक तरह की हाइपर-रिएक्टिविटी पैदा कर सकती है।
- यही अत्यधिक संवेदनशील प्रतिक्रिया ऑटोइम्यून लिवर डिजीज की संभावना बढ़ा सकती है।
- दूसरी ओर, B एंटीजन इम्यून सिस्टम में अपेक्षाकृत कम प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं, इसलिए इस ग्रुप में जोखिम कम है।
इस तरह ब्लड ग्रुप सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि हमारे शरीर की रक्षा प्रणाली से गहराई से जुड़ी हुई जैविक विशेषता बन जाता है।
क्या ब्लड ग्रुप A वालों को घबराना चाहिए? बिल्कुल नहीं
रिसर्च में सामने आया कि ब्लड ग्रुप A वालों में जोखिम जरूर अधिक है, पर इसका मतलब यह नहीं कि A ब्लड ग्रुप के हर व्यक्ति को लिवर रोग हो ही जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड ग्रुप सिर्फ एक जोखिम कारक (risk factor) है—यह बीमारी का कारण नहीं है। इसका मतलब है:
✔ A ब्लड ग्रुप वालों में संभावना अधिक है ✘ लेकिन यह बीमारी निश्चित रूप से होगी, ऐसा नहीं है
यानी अगर आपका ब्लड ग्रुप A है, तो आपको सिर्फ अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
इन शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
ऑटोइम्यून लिवर डिजीज धीरे-धीरे बढ़ती है, और जब तक लक्षण स्पष्ट होते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। इसलिए इन शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है:
- लगातार थकान रहना
- जोड़ों में दर्द
- पेट के दाहिने हिस्से में भारीपन या हल्का दर्द
- स्किन में लगातार खुजली
- भूख कम लगना
- मितली या उलझन
- आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (जॉन्डिस)
- गहरे रंग का पेशाब और हल्का रंग का मल
अगर इनमें से कोई लक्षण लगातार दिखे, तो तुरंत लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) और डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
कौन-कौन से ब्लड ग्रुप को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
ब्लड ग्रुप A
- सबसे अधिक जोखिम
- नियमित LFT करवाना फायदेमंद
- अल्कोहल, जंक फूड, और फैटी डाइट से विशेष दूरी जरूरी
ब्लड ग्रुप O
- मध्यम जोखिम
- वायरल इंफेक्शन जैसे हेपेटाइटिस से तेज असर पड़ सकता है
- इम्यून सिस्टम को मजबूत रखें
ब्लड ग्रुप B
- सबसे कम जोखिम
- लेकिन इन्फ्लेमेशन बढ़ाने वाले खान-पान से बचना जरूरी
ब्लड ग्रुप AB
- मिश्रित लक्षण
- A और B दोनों एंटीजन का असर हो सकता है
लिवर को स्वस्थ रखने के आसान नियम
ब्लड ग्रुप चाहे जो हो, अगर आप कुछ आधारभूत नियम अपनाएं, तो गंभीर लिवर बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है:
- रोज 8–10 गिलास पानी
- अत्यधिक तेल, ग्रीसी और प्रोसेस्ड फूड से दूरी
- नियमित एक्सरसाइज
- धूम्रपान और शराब से परहेज
- हेपेटाइटिस A और B के टीके
- लो-फैट, हाई-फाइबर डाइट
- नियमित मेडिकल चेकअप
निष्कर्ष: आपका ब्लड ग्रुप आपके लिवर की कहानी भी समझा सकता है
यह रिसर्च स्वास्थ्य जगत के लिए एक बड़ा संकेत है कि ब्लड ग्रुप सिर्फ पहचान से ज्यादा महत्व रखता है। यह आपकी इम्यून प्रतिक्रिया और गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए:
- अगर आपका ब्लड ग्रुप A है, तो सतर्क रहें,
- अगर O, B, या AB है, तब भी लक्षणों को हल्के में न लें।
समय पर जांच, सही खान-पान और स्वस्थ दिनचर्या आपको इस बीमारी से काफी हद तक बचा सकती है।
Source: Punjab Keshri


