आधार कार्ड को लेकर सरकार का बड़ा फैसला ! जानें क्या होगा असर
सरकार ने आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में अमान्य घोषित किया। जानें इसका आम जनता, सरकारी योजनाओं और दस्तावेजों पर क्या असर पड़ेगा।

आधार कार्ड को लेकर सरकार का बड़ा फैसला !
उत्तरप्रदेश
1:07 PM, Nov 28, 2025
O News हिंदी Desk
अब आधार कार्ड जन्मतिथि का प्रमाण नहीं! यूपी सरकार का बड़ा फैसला, आम जनता पर सीधे असर—जानें पूरी खबर
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आधार कार्ड को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। यह फैसला सीधे करोड़ों लोगों से जुड़ा है, इसलिए इसकी जानकारी हर नागरिक के लिए बेहद जरूरी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब आधार कार्ड को जन्मतिथि (Date of Birth) के प्रमाण के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह निर्णय योजना विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल द्वारा जारी आदेश के बाद सभी विभागों में लागू कर दिया गया है।
यह निर्णय क्यों लिया गया? क्या इसका असर नौकरी, एडमिशन, राशन कार्ड, सरकारी योजनाओं और दस्तावेजों पर पड़ेगा? क्या आधार कार्ड पर दर्ज जन्मतिथि अब बेकार हो जाएगी? राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ क्या हैं? आइए पूरी कहानी विस्तार से समझते हैं।
▶ क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
योजना विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल ने अपने आदेश में UIDAI के एक आधिकारिक पत्र का हवाला दिया है। इस पत्र के अनुसार—
- आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि मात्र ‘डिक्लेयर’ की गई जानकारी होती है।
- जन्मतिथि का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या जन्म प्रमाणपत्र इससे लिंक नहीं होता।
- इसलिए इसे वैध जन्मतिथि प्रमाण (Valid Date of Birth Proof) नहीं माना जा सकता।
सरकार की नजर में आधार सिर्फ पहचान (Identity Proof) बताने वाला दस्तावेज है, लेकिन जन्म की तारीख का प्रमाण नहीं। यही कारण है कि अब विभागों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि—
“आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार न किया जाए।”
UP Goverment
▶ किन-किन विभागों में लागू होगा निर्णय?
सरकार ने आदेश जारी करते हुए सभी विभागों— ✓ शिक्षा ✓ स्वास्थ्य ✓ रोजगार ✓ नगर विकास ✓ ग्रामीण विकास ✓ सामाजिक कल्याण ✓ पुलिस विभाग ✓ पंचायत विभाग
सभी को निर्देशित किया है कि वे आधार कार्ड को जन्म प्रमाणपत्र की तरह न लें।
इससे उन प्रक्रियाओं पर सीधा असर पड़ेगा जहाँ DOB का प्रमाण अनिवार्य होता है:
- स्कूल/कॉलेज एडमिशन
- सरकारी नौकरी में आवेदन
- पेंशन
- वोटर लिस्ट में नाम जोड़ना
- ड्राइविंग लाइसेंस
- पासपोर्ट
- विवाह पंजीकरण
- जाति/निवास/आय प्रमाणपत्र बनवाना
- किसी भी सरकारी योजना का लाभ
▶ आधार कार्ड में आखिर कमी क्या है?
सरकार और UIDAI दोनों का एक जैसा मत है कि—
- आधार कार्ड में जन्मतिथि नागरिक द्वारा स्वयं घोषित (Self-Declared) होती है।
- कई लोग आधार बनवाते समय उम्र में बदलाव कर देते हैं।
- इसमें जन्म का आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं जुड़ा होता।
- इसलिए इसे क़ानूनी रूप से ‘Birth Certificate’ की तरह उपयोग नहीं किया जा सकता।
सरकार को कई शिकायतें मिलती रही हैं कि लोग आधार कार्ड में बदलाव करके अपने बच्चों की उम्र कम-ज्यादा कर लेते हैं और योजनाओं का गलत फायदा उठाते हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
▶ क्या अब सभी को जन्म प्रमाणपत्र बनवाना पड़ेगा?
हाँ — यदि किसी सरकारी काम में जन्मतिथि का सबूत मांगा जाएगा, तो अब सिर्फ ये ही दस्तावेज मान्य होंगे:
- जन्म प्रमाणपत्र (Birth Certificate)
- मैट्रिक/हाईस्कूल सर्टिफिकेट
- पासपोर्ट
- राज्य/केंद्र सरकार द्वारा जारी आयु प्रमाणपत्र
आधार सिर्फ एक Identity Proof रहेगा, न कि Age Proof।
▶ उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस फैसले का जोरदार समर्थन किया। उनके अनुसार—
“कई नेता और लोग बच्चों की उम्र घटाने-बढ़ाने के लिए आधार और PAN कार्ड बदल लेते हैं। यह धोखाधड़ी रोकने के लिए सही कदम है। आजम खान जैसे नेता भी इसी तरह अपने बेटे को विधायक बनवा देते हैं। अब ऐसे खेल बंद होंगे।”
मौर्य का बयान इस फैसले को एक एंटी-फ्रॉड कदम के रूप में स्थापित करता है।
▶ विपक्ष ने लगाया बड़ा आरोप – पीडीए समाज के खिलाफ साजिश?
इस फैसले पर राजनीतिक घमासान भी छिड़ गया है।
सपा के वरिष्ठ सांसद लालजी वर्मा ने आरोप लगाया कि—
- यह निर्णय पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समुदायों के खिलाफ है।
- उनके अनुसार इन वर्गों के पास अधिकतर आधार ही एकमात्र विश्वसनीय पहचान पत्र होता है।
- यदि आधार को अमान्य माना गया, तो उनके नाम मतदाता सूची से भी कट सकते हैं।
- वर्मा ने इसे एक “राजनीतिक साजिश” करार दिया है।
उनकी दलील है कि कई गरीब घरों में जन्म प्रमाणपत्र नहीं बन पाते। ऐसे में आधार ही उनका एकमात्र सहारा होता है। निर्णय से खासकर ग्रामीण व गरीब वर्गों की परेशानी बढ़ सकती है।
▶ आम जनता पर क्या होगा सीधा असर?
यह ऐसा फैसला है जो शहर से लेकर गाँव तक हर व्यक्ति की जिंदगी को सीधे प्रभावित करेगा:
1. स्कूल/कॉलेज में एडमिशन मुश्किल?
अब बच्चों का एडमिशन सिर्फ आधार से नहीं होगा। जन्म प्रमाणपत्र अनिवार्य किया जा सकता है।
2. नौकरी और सरकारी फॉर्म में दिक्कत
जहाँ DOB मांगी जाएगी, वहाँ आधार कार्ड बेकार हो जाएगा।
3. पुराने आधार पर बदली उम्र वाले लोग पकड़े जाएंगे
जिन लोगों ने आधार बनवाते समय उम्र बदल ली थी, उनका ‘गेम’ खत्म।
4. ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेगी भागदौड़
जिनके पास Birth Certificate नहीं है, उन्हें नया बनवाना पड़ेगा।
5. मतदाता सूची पर भी असर?
कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय वोटर लिस्ट सुधारने की दिशा में भी एक कदम हो सकता है।
▶ क्या आधार की वैल्यू कम हो जाएगी?
नहीं। सरकार ने सिर्फ इतना कहा है कि:
- आधार पहचान बताता है, उम्र नहीं।
- इसके उपयोग पर कोई रोक नहीं।
- लेकिन उम्र प्रमाण के लिए अब अन्य दस्तावेज जरूरी होंगे।
आधार अब भी इन कामों में मान्य रहेगा:
✓ बैंक अकाउंट ✓ सिम कार्ड ✓ सरकारी योजनाएँ ✓ पेंशन पहचान ✓ वोटर ID से लिंक ✓ पहचान सत्यापन
लेकिन ‘जन्मतिथि प्रमाण’ के रूप में नहीं।
▶ क्या उत्पन्न होंगी नई समस्याएँ?
वास्तविकता यह है कि—
- भारत में अभी भी लाखों लोगों के पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल में जन्म नहीं होने से Birth Certificate बनता ही नहीं।
- सरकारी दफ्तरों में इसे बनवाने में हफ्तों लग जाते हैं।
ऐसे में आधार पर निर्भर लोग बड़ी संख्या में प्रभावित होंगे।
▶ सरकार का तर्क—पारदर्शिता और फर्जीवाड़ा खत्म करना
सरकार का कहना है कि—
- आयु में बदलाव करके कई अपराधी और असामाजिक तत्व बच जाते हैं।
- सरकार की योजनाओं में गलत लाभ उठाया जाता है।
- उम्र छुपाकर लोग फर्जी रोजगार अवसर हासिल करते हैं।
इसलिए जन्मतिथि प्रमाण को सख्त किया जा रहा है।
▶ आगे क्या? सरकार क्या कर सकती है?
विशेषज्ञों की राय में अगले चरण में सरकार यह कर सकती है:
- Birth Certificate बनवाना आसान करे
- अस्पतालों में जन्म पंजीकरण अनिवार्य बनाए
- डिजिटल Birth Registry शुरू करे
- पुराने जन्म प्रमाणपत्र ऑनलाइन उपलब्ध कराए
ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग कानूनी दस्तावेज बनवा सकें।
निष्कर्ष — आपका आधार कार्ड बदले नहीं, लेकिन उसकी भूमिका बदल गई है
फैसला बड़ा है, असर और भी बड़ा। आधार कार्ड अब भी आपकी पहचान का अहम साधन है, लेकिन:
“आधार = पहचान प्रमाण जन्म प्रमाणपत्र = जन्मतिथि प्रमाण”
सरकार जोर दे रही है कि दोनों की भूमिकाएँ अलग हैं और दोनों का उपयोग सही जगह होना चाहिए। राजनीतिक विवाद जारी है, लेकिन आम नागरिक को अभी से Birth Certificate जैसे असली दस्तावेज तैयार रखने चाहिए।
Source: News 18


