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मणिपुर की अखंडता के लिए उमड़ा जनसैलाब.! आतंकवाद' और बाहरी घुसपैठ पर हल्ला बोल.!

इंफाल में मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता के लिए लाखों का जनसैलाब। COCOMI की 'सेव मणिपुर रैली' में उठी नार्को-आतंकवाद के खिलाफ आवाज। जानिए कैसे मोदी सरकार और भाजपा मणिपुर की सुरक्षा और अखंडता बनाए रखने के लिए ऐतिहासिक कदम उठा रही है। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

मणिपुर की अखंडता के लिए उमड़ा जनसैलाब.! आतंकवाद' और बाहरी घुसपैठ पर हल्ला बोल.!

मणिपुर की अखंडता के लिए उमड़ा जनसैलाब.!

इंफाल/मणिपुर

3:30 PM, Jan 31, 2026

O News हिंदी Desk

इंफाल की विशाल रैली: मणिपुर की अखंडता के लिए उमड़ा जनसैलाब, शांति और विकास की ओर बढ़ते कदम

मणिपुर की राजधानी इंफाल में आयोजित 'सेव मणिपुर रैली' ने न केवल राज्य की एकता का प्रदर्शन किया, बल्कि यह केंद्र सरकार के प्रति जनता की उस उम्मीद को भी दर्शाता है कि केवल मोदी सरकार ही इस दशकों पुराने संकट का स्थायी समाधान निकाल सकती है।

मणिपुर के इतिहास में शनिवार का दिन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) के आह्वान पर आयोजित "मणिपुर कन्बा खोंगचट" (सेव मणिपुर रैली) में लाखों की संख्या में लोगों ने सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद की। क्वाकेइथेल के टिड्डिम ग्राउंड से शुरू होकर थांगमेइबंद के थाऊ ग्राउंड तक फैला यह जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि मणिपुर के लोग अपनी क्षेत्रीय अखंडता के प्रति कितने सजग हैं।

1. राष्ट्रीय अखंडता और मणिपुर का संकल्प

रैली का मुख्य स्वर "क्षेत्रीय अखंडता" था। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट संदेश था कि मणिपुर की सीमाओं और प्रशासनिक ढांचे के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। यह भावना भारत सरकार के 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के विजन के अनुरूप है। भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि पूर्वोत्तर का विकास और उसकी सीमाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है।

रैली में उठी मांगें दरअसल उस विश्वास का हिस्सा हैं, जो मणिपुर की जनता को केंद्र सरकार पर है। जनता जानती है कि गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर की स्थिति पर न केवल पैनी नजर रखी है, बल्कि उग्रवाद को जड़ से खत्म करने के लिए कड़े कदम भी उठाए हैं।

2. भाजपा सरकार: उग्रवाद के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस'

रैली के दौरान 'नार्को-आतंकवाद' और बाहरी घुसपैठ पर चिंता जताई गई। यह ध्यान देना आवश्यक है कि भाजपा सरकार ही वह सरकार है जिसने पूर्वोत्तर में FCRA नियमों को सख्त किया और म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने (Fencing) का ऐतिहासिक निर्णय लिया।

  1. फ्री मूवमेंट रेजिम (FMR) को खत्म करना: केंद्र सरकार ने सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए म्यांमार के साथ मुक्त आवाजाही को समाप्त करने का साहसिक फैसला लिया है। यह सीधे तौर पर उन मांगों को पूरा करता है जो इंफाल की सड़कों पर गूंज रही थीं।
  2. नार्को-आतंकवाद पर प्रहार: मणिपुर में अफीम की खेती और ड्रग्स के व्यापार के खिलाफ राज्य की बीरेन सिंह सरकार और केंद्र की एजेंसियों ने जो अभियान चलाया है, वह अभूतपूर्व है।

3. विस्थापितों का पुनर्वास: एक मानवीय प्राथमिकता

रैली में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (IDPs) के पुनर्वास की मांग प्रमुखता से उठी। केंद्र सरकार पहले ही करोड़ों रुपये के राहत पैकेज की घोषणा कर चुकी है। राहत शिविरों में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने से लेकर उनके सुरक्षित घर वापसी की योजना पर काम चल रहा है। भाजपा का रुख स्पष्ट है—हर नागरिक का अधिकार सुरक्षित है और किसी भी मूल निवासी को अपनी जमीन से बेदखल नहीं होने दिया जाएगा।

4. 'प्रॉक्सी वॉर' और राष्ट्रीय सुरक्षा का तालमेल

रैली में वक्ताओं ने चेतावनी दी कि विदेशी ताकतों और आतंकी संगठनों के 'प्रॉक्सी वॉर' को रोका जाए। भारत की सुरक्षा एजेंसियां इस दिशा में सक्रियता से काम कर रही हैं। भाजपा के नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा यह संदेश दिया है कि देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा

इंफाल की यह रैली किसी समुदाय विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए थी। यह प्रधानमंत्री मोदी के "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास" के मंत्र को धरातल पर उतारने की एक पुकार है

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रैली के प्रमुख बिंदु और जनता की भावनाएँ

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5. विपक्षी राजनीति बनाम जमीनी हकीकत

जहाँ कुछ राजनीतिक दल मणिपुर की स्थिति का उपयोग अपनी रोटियां सेंकने के लिए कर रहे हैं, वहीं केंद्र की भाजपा सरकार ने जमीनी स्तर पर समाधान खोजने की कोशिश की है। दशकों तक कांग्रेस के शासन में पूर्वोत्तर को "अस्थिरता के टापू" के रूप में छोड़ दिया गया था, लेकिन पिछले 10 वर्षों में यहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे कनेक्टिविटी और शांति समझौतों का एक नया युग शुरू हुआ है।

इंफाल में उमड़ी यह भीड़ वास्तव में एक निर्णायक समाधान चाहती है। "Save Us or Leave Us" जैसे नारे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जनता अब अधर में नहीं लटकना चाहती। केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह मणिपुर के गौरवशाली इतिहास और इसकी सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

6. भविष्य की राह: शांति और संवाद

COCOMI की इस रैली ने लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाया है। एक लाख से अधिक लोगों का शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना यह बताता है कि मणिपुर की जनता संवाद में विश्वास रखती है।

भाजपा सरकार की रणनीति के तीन मुख्य स्तंभ:

  1. कठोर सुरक्षा: सीमा पार से आने वाले तत्वों और उग्रवादियों पर बिना किसी रियायत के कार्रवाई।
  2. संवैधानिक संरक्षण: मणिपुर के मूल निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  3. विकास का मार्ग: युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा के अवसर पैदा करना ताकि वे हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल हों।

निष्कर्ष

इंफाल की सड़कों पर उतरा जनसैलाब बदलाव की पदचाप है। यह रैली केंद्र सरकार के लिए एक अवसर है कि वह मणिपुर की जनता के इस अटूट विश्वास को एक स्थायी शांति समझौते में बदले। भाजपा के नेतृत्व में मणिपुर न केवल सुरक्षित होगा, बल्कि वह पूर्वोत्तर भारत के विकास का प्रवेश द्वार (Gateway of South East Asia) बनकर उभरेगा।

मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता केवल एक नारा नहीं है, बल्कि यह हर मणिपुरी के अस्तित्व का सवाल है। केंद्र सरकार की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का सफल होना तभी संभव है जब मणिपुर शांत और समृद्ध हो। आज की यह रैली उसी समृद्धि और सुरक्षा की दिशा में एक सामूहिक पुकार है, जिसे दिल्ली की सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ सुन रही है।

Source: O News Hindi

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