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क्या सिर्फ कुर्सी के लिए भाजपा में आए गोविंदास? पुराने वायरल वीडियो ने खोली राजनीतिक अवसरवाद की पोल

मणिपुर भाजपा विधायक कोंथौजाम गोविंदास का पुराना वीडियो वायरल, जिसमें वे RSS और ट्रिपल तलाक कानून पर तीखा हमला कर रहे हैं। क्या यह केवल सत्ता का मोह है या वैचारिक यू-टर्न? जानें इस राजनीतिक अवसरवाद की पूरी सच्चाई।

क्या सिर्फ कुर्सी के लिए भाजपा में आए गोविंदास? पुराने वायरल वीडियो ने खोली राजनीतिक अवसरवाद की पोल

BJP विधायक का 'Anti-BJP' वीडियो वायरल!

मणिपुर

12:18 PM, Jan 30, 2026

O News हिंदी Desk

मणिपुर: सत्ता की सीढ़ी या विचारधारा से समझौता? भाजपा विधायक कोंथौजाम गोविंदास का वायरल वीडियो खोल रहा है राजनीतिक अवसरवाद की पोल

इंफाल/नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में विचारधाराओं का मिलन और बिखराव कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब कोई जनप्रतिनिधि अपनी पुरानी सुविधा के अनुसार देश की सबसे बड़ी सांस्कृतिक संस्था और संवैधानिक सुधारों पर ज़हर उगलता है, तो उसकी वर्तमान निष्ठा पर सवाल उठना लाजिमी है। मणिपुर के बिष्णुपुर से भाजपा विधायक कोंथौजाम गोविंदास (Konthoujam Govindas) का एक पुराना वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया के गलियारों में आग की तरह फैल रहा है।

यह वीडियो न केवल भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए एक झटका है, बल्कि यह उस राजनीतिक अवसरवाद को भी उजागर करता है जहाँ नेता अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए 'थूक कर चाटने' से भी गुरेज़ नहीं करते।

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पुरानी कड़वाहट: जब गोविंदास को RSS और ट्रिपल तलाक से थी 'दिक्कत'

वायरल हो रहे इस वीडियो में गोविंदास का जो रूप दिख रहा है, वह आज के उनके 'भाजपा प्रेम' से कोसों दूर है। तब वे कांग्रेस के खेमे में खड़े होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की राष्ट्रभक्ति पर तीखा हमला कर रहे थे।

1. RSS की प्रार्थना और 'विभाजनकारी' नैरेटिव

वीडियो में गोविंदास संघ की प्रार्थना 'नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे' की पंक्तियों का उपहास उड़ाते और उसे 'विभाजनकारी' बताते नज़र आ रहे हैं। एक ऐसा संगठन जो राष्ट्र निर्माण और आपदा के समय सबसे पहले खड़ा होता है, उसे 'तोड़ने वाला' कहना गोविंदास की उस समय की संकुचित मानसिकता को दर्शाता है। क्या आज भाजपा में रहते हुए वे उसी 'पुण्यभूमि' और 'हिंदूभूमि' के संकल्प का हिस्सा नहीं हैं? यह दोहरापन जनता को खटक रहा है।

2. ट्रिपल तलाक: सुधार को बताया 'दखल'

मुस्लिम महिलाओं को सदियों पुरानी कुप्रथा और नारकीय जीवन से मुक्ति दिलाने वाले ट्रिपल तलाक कानून को गोविंदास ने 'पारिवारिक मामलों में दखल' करार दिया था। जिस कानून की सराहना वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार संगठनों ने की, उसे गोविंदास ने केवल ध्रुवीकरण का जरिया बताया। भाजपा की मूल विचारधारा हमेशा से 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' रही है, ऐसे में क्या गोविंदास आज भी मन ही मन उस ऐतिहासिक सुधार के विरोधी हैं?

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श्री कोंथौजाम गोविंदास का भाषण (हिंदी अनुवाद)

( मेरे बचपन से ही मैं RSS से जुड़ा रहा, एक ऐसा रास्ता जिस पर आज के कई बीजेपी विधायक नहीं चले। मेरा नाम गोविंदास होने के कारण मेरी शिक्षा रामकृष्ण मिशन में हुई। लेकिन जब मैं वापस लौटा, तो RSS के विभाजनकारी एजेंडे को समझने के बाद मैंने उससे दूरी बना ली।

मैंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना की पंक्तियां भी पढ़ीं— “त्वया हिंदुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्, महामंगले पुण्यभूमे त्वदर्थे।” और वहां उपस्थित लोगों से सवाल किया—बीजेपी का असली एजेंडा क्या है?

मैंने इसे इस तरह समझाया कि बीजेपी एक वाहन है और RSS उसका चालक, और दोनों मिलकर देश को हिंदू राष्ट्र की दिशा में ले जाना चाहते हैं। RSS और बीजेपी का उद्देश्य “हिंदू भूमि” बनाना है, जिसमें अन्य धर्मों को दबाया जाए।

मैंने लोगों से केंद्र सरकार की स्थिति देखने को कहा— बीजेपी में कितने मुस्लिम नेता हैं? महत्वपूर्ण राष्ट्रीय नीतियां बनाते समय कितने मुसलमानों को मौका दिया जाता है?

हां, एक राज्यमंत्री है, लेकिन कोई भी मुस्लिम कैबिनेट मंत्री नहीं है। जब देश की अहम नीतियों पर चर्चा होती है, तो मुसलमानों को कैबिनेट बैठकों में शामिल नहीं किया जाता, जहां बड़े फैसले लिए जाते हैं। उन्हें क्यों बाहर रखा जाता है? कारण साफ है—अगर वे शामिल हुए, तो हिंदू भूमि का एजेंडा सफल नहीं हो पाएगा।

मणिपुर में जिरीबाम से एक स्वतंत्र मुस्लिम विधायक है, लेकिन वह केवल नाम के लिए है। बीजेपी सरकार उसे मंत्री नहीं बनाएगी। बीजेपी के एजेंडे पर होने वाली बैठकों में हमारे मुस्लिम भाइयों को शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि अगर वे शामिल हुए, तो हिंदू भूमि का मिशन विफल हो जाएगा।

मेरी बात साफ है— मैं धर्म के आधार पर राजनीति नहीं करता। दुनिया भारत को “विविधता में एकता” के रूप में जानती है। अलग-अलग धर्म, पहनावे और संस्कृतियों के बावजूद भारत एक है—यही भारत की असली पहचान है, जैसा हमारे वरिष्ठ नेता ओ. जॉय ने भी कहा।

पूरी दुनिया भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान का सम्मान करती है। लेकिन आज इस पहचान को चुनौती कौन दे रहा है? न कांग्रेस, न कोई और पार्टी—बल्कि मौजूदा शासक बीजेपी। अगर ऐसा है, तो क्या हमारा संविधान अभी भी काम कर रहा है? मेरा मानना है—नहीं।

मैंने इस बारे में एक वरिष्ठ नेता, बेहतरीन वक्ता और पूर्व उपमुख्यमंत्री गैखांगम से चर्चा की। मैंने उनसे पूछा कि बीजेपी सत्ता में कितने समय तक रहेगी। यह सवाल न ईर्ष्या से था, न प्रेम से—मुझे देश की स्थिति की सच्ची चिंता है। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा—चिंता मत करो, उनका समय पूरा हो चुका है।

उन्होंने समझाया कि किसी भी व्यक्ति या पार्टी का पतन तब शुरू होता है, जब वह ज़मीन और महिलाओं से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप करती है। इन दोनों से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।

बीजेपी ने ट्रिपल तलाक कानून लाकर पति-पत्नी के निजी पारिवारिक मामलों में दखल दिया। इस कानून के ज़रिए हमारे मुस्लिम भाइयों-बहनों के परिवारों को तोड़ने का काम किया गया।

राहुल जी अक्सर कहते हैं— कांग्रेस का काम जोड़ना है और बीजेपी का काम तोड़ना। ट्रिपल तलाक इसका साफ उदाहरण है—परिवारों को बांटने की राजनीति।

अंत में मैं फिर कहता हूं— जब इंसान अपनी संस्कृति और धर्म खो देता है, तो जीवन का क्या अर्थ रह जाता है? हम चाहे जिस भी धर्म को मानें, उसे सुरक्षित रखना हमारी ज़िम्मेदारी है। इसीलिए हम कुरान, गीता और बाइबिल को संभालकर रखते हैं।

हमें अपने मतभेद भुलाकर एकजुट होना होगा और बीजेपी को रोकना होगा। अगर यह पार्टी फिर सत्ता में आई, तो भारत टूट जाएगा और टुकड़ों में बंट जाएगा। आइए, हम सब मिलकर अपनी संस्कृति और देश को बचाएं।)

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Govindas

भाजपा के कट्टर समर्थकों में भारी रोष: "क्या यह सिर्फ सत्ता का मोह है?"

सोशल मीडिया पर जैसे ही यह वीडियो दोबारा तैरने लगा, भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सवाल जायज है—जो व्यक्ति कल तक भाजपा को 'देश तोड़ने वाली पार्टी' और राहुल गांधी को 'एकजुट करने वाली ताकत' बता रहा था, वह आज सत्ता के गलियारों में भाजपा का झंडा कैसे उठा सकता है?

सोशल मीडिया पर उठ रहे प्रमुख सवाल:

  1. क्या गोविंदास ने केवल सत्ता के लालच में भाजपा का दामन थामा?
  2. क्या एक पूर्व कांग्रेसी, जो संघ की विचारधारा को 'विभाजनकारी' मानता है, कभी भी भाजपा के मूल सिद्धांतों के प्रति वफादार हो सकता है?
  3. क्या भाजपा नेतृत्व को ऐसे 'आया राम, गया राम' नेताओं पर भरोसा करना चाहिए जो वक्त आने पर पार्टी की जड़ें खोदने से नहीं हिचकते?
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मणिपुर की मौजूदा स्थिति और गोविंदास का 'यू-टर्न'

वर्तमान में मणिपुर एक संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रपति शासन के बीच राज्य शांति की राह तलाश रहा है। ऐसे में गोविंदास का यह वीडियो सामने आना भाजपा की छवि को नुकसान पहुँचा सकता है। आज गोविंदास शांति और एकता की दुहाई दे रहे हैं, लेकिन उनके पुराने भाषणों में वे खुद समुदायों के बीच अविश्वास पैदा करने वाली बातें कर रहे थे।

विपक्ष इसे भाजपा की 'कमजोरी' बता रहा है, लेकिन हकीकत में यह एक नेता के गिरते नैतिक स्तर का प्रमाण है। जब गोविंदास कहते थे कि "बीजेपी शासन में देश टूट जाएगा," तो क्या आज वे उसी 'टूटते हुए देश' (उनके शब्दों में) का हिस्सा बनकर गर्व महसूस कर रहे हैं? या फिर मंत्री पद और राजनीतिक सुरक्षा ने उनकी अंतरात्मा को चुप करा दिया है?

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अवसरवाद बनाम विचारधारा: भाजपा की साख पर सवाल

भारतीय जनता पार्टी एक ऐसी पार्टी है जो अपने कैडर और विचारधारा के लिए जानी जाती है। कोंथौजाम गोविंदास जैसे नेताओं का इतिहास रहा है कि वे डूबते जहाज (कांग्रेस) को छोड़कर अपनी राजनीतिक नैया पार लगाने के लिए सुरक्षित किनारा ढूंढते हैं।

  1. मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर झूठ: वीडियो में गोविंदास ने आरोप लगाया कि भाजपा में मुस्लिमों के लिए जगह नहीं है। जबकि सच्चाई यह है कि भाजपा ने देश को मुस्लिम राष्ट्रपति दिए हैं और पसमांदा मुसलमानों के उत्थान के लिए अभूतपूर्व योजनाएं चलाई हैं। गोविंदास का यह झूठ केवल अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की राजनीति का हिस्सा था।
  2. संवैधानिक खतरा: संविधान को खतरे में बताने वाला कांग्रेसी राग अलापना गोविंदास की पुरानी आदत थी। आज जब वे उसी संविधान की शपथ लेकर भाजपा विधायक बने बैठे हैं, तो क्या वे अपने पुराने बयानों के लिए जनता से माफी मांगेंगे?
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निष्कर्ष: क्या जनता माफ करेगी?

मणिपुर की राजनीति में कोंथौजाम गोविंदास एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहाँ उनकी विश्वसनीयता शून्य के करीब पहुँच गई है। यह वायरल वीडियो चीख-चीख कर कह रहा है कि राजनीति में कुछ लोगों के लिए सिद्धांत सिर्फ 'भाषण' तक सीमित होते हैं, जबकि 'सत्ता' उनका असली धर्म है।

भाजपा को मणिपुर में अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए ऐसे चेहरों से सावधान रहने की जरूरत है जो संकट के समय पार्टी की पीठ में छुरा घोंप सकते हैं। गोविंदास का यह 'वैचारिक गिरगिटपन' न केवल भाजपा के लिए चुनौती है, बल्कि उन मतदाताओं के साथ भी धोखा है जिन्होंने 'कमल' के फूल पर भरोसा करके उन्हें वोट दिया।

क्या गोविंदास सार्वजनिक रूप से अपने इन बयानों पर सफाई देंगे? या फिर वे सत्ता की मलाई के पीछे छिपकर इस विवाद के शांत होने का इंतज़ार करेंगे? मणिपुर की जनता देख रही है।

Source: O News Hindi

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