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पाकिस्तान में शिक्षा संकट: 63% युवा स्कूल से दूर

Pakistan's 2023 census reveals 63% youth never went to school and 75% women lack education, exposing a national crisis affecting jobs and security.

पाकिस्तान में शिक्षा संकट: 63% युवा स्कूल से दूर

पाकिस्तान में शिक्षा संकट

delhi

8:46 PM, Jan 10, 2026

O News हिंदी Desk

पाकिस्तान का ‘शिक्षा संकट’: 63% युवा कभी स्कूल नहीं गए — क्या यही है आतंक का ईंधन?

दुनिया के नक्शे पर “अस्थिर और अशांत” के टैग से पहचाने जाने वाले पाकिस्तान पर जब बात आती है आतंकवाद, कट्टरवाद और चरमपंथ की, तो अक्सर सवाल उठता है — इसकी जड़ कहाँ है? हथियार? नफरत? विदेश नीति? या फिर कुछ और? लेकिन इस बार जो आंकड़े सामने आए हैं, वे एक और कड़वी सच्चाई पर रोशनी डालते हैं — पाकिस्तान में शिक्षा का भयावह पतन।

देश की 2023 जनगणना से जुड़े नए आंकड़ों ने खोलकर रख दिया है कि पाकिस्तान में शिक्षा की स्थिति किसी राष्ट्रीय आपदा से कम नहीं। रिपोर्ट बताती है कि:

  1. 63% युवा कभी स्कूल नहीं गए
  2. 23% किशोर औपचारिक शिक्षा से वंचित
  3. महिलाओं में हाल और भी बुरा – लगभग 75% ने स्कूल का नाम तक नहीं देखा

जब एक देश की युवा पीढ़ी का यह हाल हो, तो समझना कठिन नहीं कि वह समाज किस दिशा में जा रहा होगा।

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किसी देश के लिए सबसे बड़ा खतरा उसकी अनपढ़ युवा आबादी

किसी भी राष्ट्र की ताकत उसकी युवा आबादी होती है। वही युवा भविष्य का नेतृत्व करते हैं, अर्थव्यवस्था चलाते हैं, लोकतंत्र को मजबूत करते हैं और समाज में बदलाव लाते हैं। लेकिन पाकिस्तान के मामले में युवा ताकत बोझ में बदलती जा रही है।

जनगणना के निष्कर्ष बताते हैं कि पाकिस्तान की बड़ी आबादी ऐसे युवाओं की है जो:

  1. न स्कूल गए
  2. न कौशल सीखा
  3. न नौकरी के योग्य बने
  4. न नागरिक जीवन का हिस्सा बन पाए

यही वे हालात हैं जहाँ कट्टरपंथी संगठन, भड़काऊ विचारधाराएँ और आतंकी समूह अपनी भर्ती करते हैं।

क्योंकि जब समाज में शिक्षा नहीं, रोजगार नहीं, स्वास्थ्य नहीं — तो खाली दिमाग में भरने के लिए सिर्फ नफरत, बंदूक और मौलाना ही बचते हैं।

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महिलाओं की हालत ‘त्रासदी’ से भी आगे

अगर आंकड़ों को जेंडर के हिसाब से देखें तो तस्वीर और भयावह हो जाती है। 25 साल की एक लड़की जिसने कभी स्कूल नहीं देखा, उसके जीवन की संभावनाएँ क्या होंगी?

जनगणना में सामने आया कि:

  1. 15–29 आयु वर्ग की लगभग तीन-चौथाई महिलाएँ स्कूल नहीं गईं
  2. जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा लगभग आधा है

यहाँ सवाल सिर्फ शिक्षा का नहीं, समानता, अधिकार और veiligheid (सुरक्षा) का भी है। जब बड़ी संख्या में महिलाएँ:

  1. न पढ़ पाती हैं,
  2. न समझ पाती हैं,
  3. न आर्थिक रूप से सक्षम होती हैं,

तो देश सामाजिक, आर्थिक और लोकतांत्रिक — तीनों मोर्चों पर पिछड़ता है।

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ये शिक्षा संकट सिर्फ ‘पढ़ाई’ का मुद्दा नहीं — पूरी जिंदगी प्रभावित

इस पर विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट सिर्फ डिग्री न होने का मामला नहीं बल्कि:

✔ रोजगार से वंचित रहना

✔ स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहना

✔ नागरिक अधिकारों में भागीदारी न होना

✔ गरीबी की विरासत का जारी रहना

यानी यह आजीवन हाशिए पर धकेलने वाला असल संकट है।

पाकिस्तान में कई इलाकों में आज भी गरीबी, धार्मिक कट्टरता, सांस्कृतिक दबाव, असुरक्षा और राजनीतिक भ्रष्टाचार मिलकर शिक्षा को एक ऐसा विलासिता बना देते हैं जो आम जनता की पहुंच से बाहर है।

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आर्थिक तंगी + राजनीतिक अस्थिरता = ‘शिक्षा का पतन’

पाकिस्तान आज भारी आर्थिक संकट में फंसा है। IMF के ऋण, महंगाई, राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्ट तंत्र ने मिलकर शिक्षा को सरकारी प्राथमिकता से ही बाहर कर दिया है।

शिक्षा को सबसे कम बजट मिलता है। स्कूलों में:

  1. शिक्षक नहीं
  2. किताबें नहीं
  3. सुरक्षा नहीं
  4. इन्फ्रा नहीं

और कई इलाकों में तो लड़कियों के स्कूल आतंकियों द्वारा उड़ा दिए जाते हैं।

एक ऐसे मुल्क में जहाँ सरकार भी कई क्षेत्रों पर नियंत्रण नहीं रख पाती — वहाँ शिक्षा कैसे बचेगी?

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खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब के युवक क्यों फंस रहे हैं?

हाल ही में सतत विकास नीति संस्थान ने संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं सेवा प्राधिकरण के सहयोग से एक शोध किया। इस शोध में खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब के उन युवाओं की स्थिति का अध्ययन किया गया जो:

  1. स्कूल से बाहर हैं
  2. शिक्षा छोड़ चुके हैं
  3. रोजगार से बाहर हैं
  4. नागरिक जीवन में शामिल नहीं

शोध का मकसद था समझना कि उन्हें:

✔ शिक्षा में पुनः प्रवेश

✔ रोजगार

✔ नागरिक भागीदारी

इन सबकी ज़रूरत कैसे और कहाँ है?

पर असल तस्वीर यह निकली कि ऐसी कोई मजबूत व्यवस्था पाकिस्तान में है ही नहीं।

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पाकिस्तान के लिए शिक्षा क्यों ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मुद्दा होना चाहिए?

भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों ने पिछले दशकों में शिक्षा पर ध्यान दिया, डिजिटल शिक्षा को बढ़ाया, महिलाओं की भागीदारी मजबूत की। लेकिन पाकिस्तान ने क्या किया?

❗ आतंकवाद को संरक्षण

❗ धार्मिक कट्टरता को राज्य नीति

❗ सेना और ISI का वर्चस्व

❗ राजनीतिक अस्थिरता

❗ शिक्षा पर न्यूनतम निवेश

इसलिए आज पाकिस्तान में शिक्षा मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का संकट बन चुका है। क्यों?

क्योंकि:

  1. अनपढ़ समाज = कट्टरपंथ का मैदान
  2. बेरोजगार युवा = आतंकी संगठनों की भर्ती का स्रोत
  3. राजनीतिक अशिक्षा = भीड़ द्वारा फैसले, कानून से ज्यादा भीड़तंत्र
  4. महिलाओं का पिछड़ना = आर्थिक पतन, जनसंख्या विस्फोट, सामाजिक अस्थिरता
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एक देश जहाँ स्कूल से ज्यादा मदरसे और बंदूकें

पाकिस्तान में आज भी कई जिलों में मदरसों की संख्या स्कूलों से ज्यादा है। जहाँ आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, गणित और नागरिकता की जगह धार्मिक कट्टरता भरी जाती है।

सवाल यह नहीं कि धार्मिक शिक्षा गलत है — बल्कि यह कि सिर्फ धार्मिक शिक्षा देकर युवा को दुनिया से अनजान रखना गलत है।

राज्य अगर बच्चों के हाथ में किताब की जगह:

  1. विचारधारा,
  2. बंदूक,
  3. या फिर प्रचार थमा दे,

तो परिणाम क्या होगा?

जवाब दुनिया पिछले 30 साल से देख रही है।

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पाकिस्तान का भविष्य — सवालों में घिरा हुआ

पाकिस्तान की युवा जनसंख्या विशाल है। पर सवाल यह है कि:

➡ क्या यह आबादी अवसर बनेगी? ➡ या बोझ? ➡ या फिर अस्थिरता का स्रोत?

क्योंकि जब 63% युवाओं को स्कूल का रास्ता नहीं मिला — तो उन्हें मिलेगा कौन?

  1. कट्टरपंथी नेता?
  2. आतंकी कैंप?
  3. मदरसों की दकियानूसी शिक्षा?
  4. या बेरोजगारी और बेबसी?

किसी भी देश के लिए इससे बड़ा खतरा क्या होगा?

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अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी चेतावनी

यह सिर्फ पाकिस्तान का आंतरिक मामला नहीं। अनपढ़ और बेरोजगार युवाओं का इतना बड़ा समूह क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर सीधा असर डालता है।

  1. मानव तस्करी
  2. आतंकवाद
  3. कट्टर विचारधारा
  4. सीमा पार हिंसा
  5. सामाजिक अस्थिरता

ये सब इसी शिक्षा संकट की उपज हैं।

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निष्कर्ष: किताबों से दूर, अराजकता के करीब होता जा रहा पाकिस्तान

शिक्षा एक सभ्य समाज की बुनियाद है। और आज पाकिस्तान उस बुनियाद को खोता जा रहा है।

जब देश की सरकारें सत्ता, सेना, ISI और विदेश नीति में उलझी रहती हैं — तो स्कूल, बच्चे, महिलाएँ और समाज अंधेरे में डूब जाते हैं।

आज पाकिस्तान के लिए असली सवाल यह नहीं कि:

  1. दुश्मन कौन है?
  2. खतरा कहाँ से है?

असली सवाल यह है:

अगर पाकिस्तान अपने युवाओं और महिलाओं को शिक्षा नहीं देगा, तो उसका भविष्य कौन संभालेगा?

क्योंकि बंदूक और कट्टरता से देश नहीं चलता— पुस्तक और शिक्षा से चलता है।

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