Gold Price Today: सोना फिर लुढ़का, आगे कैसी रहेगी चाल? निवेश रणनीति जानें
Gold Price: मुनाफावसूली से सोना गिरा; फेड रेट कट की उम्मीदें बनी रहीं। जानें आगे सोने-चांदी की संभावित रेंज, अहम सपोर्ट-रेजिसटेंस और निवेश की स्ट्रैटेजी।

सोना फिर लुढ़का, आगे कैसी रहेगी चाल? PICS - AI
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3:48 PM, Nov 27, 2025
O News हिंदी Desk
Gold Price Today: मुनाफावसूली से सोना फिर लुढ़का; आगे कैसी रह सकती है चाल, निवेशकों के लिए क्या हो स्ट्रैटेजी?
सोने की कीमतों में मंगलवार को एक बार फिर दबाव देखने को मिला है। घरेलू वायदा बाजार MCX पर गोल्ड दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट में लगभग 645 रुपये की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद भाव फिसलकर ₹1,25,286 प्रति 10 ग्राम के लो तक पहुंच गया। वैश्विक बाजारों में भी सोना कमजोर हुआ है। एक दिन पहले जो सोना दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर था, वहीं अगले ही दिन तेज प्रॉफिट बुकिंग से कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली।
निवेशकों के दिमाग में अब यह बड़ा सवाल है—क्या यह गिरावट लंबी चलेगी? कौन से लेवल महत्वपूर्ण हैं? और मौजूदा समय में निवेशकों को कौन सी रणनीति अपनानी चाहिए? आइए इन्हीं सवालों का विस्तृत विश्लेषण करते हैं।
◆ मुनाफावसूली के चलते लुढ़का सोना
दुनिया भर के बाजारों में सोना सोमवार को 2-सप्ताह के हाई पर पहुंचा था। इसके बाद ट्रेडर्स ने तेजी का फायदा उठाते हुए प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी। भारी बिकवाली के कारण कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का हाजिर भाव 0.5% गिरकर 4,145 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि दिसंबर डिलीवरी वाला यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 0.6% गिरकर 4,140.80 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड हुआ।
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब भी सोने में शॉर्ट-टर्म में तेज उछाल आता है, उसके तुरंत बाद निवेशक प्रोफिट बुक करते हैं। मौजूदा गिरावट भी उसी ट्रेंड का हिस्सा है।
◆ फेड रेट कट की उम्मीदें अभी भी बरकरार
सोने की कीमतों पर सबसे बड़ा प्रभाव अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की नीतियों का पड़ता है। बाजार में उम्मीद है कि फेड दिसंबर की मीटिंग में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।
फेड अधिकारियों ने संकेत दिए:
- लेबर मार्केट की स्थिति कमजोर
- आर्थिक आंकड़ों में सुस्ती
- ब्याज दरों को कम करने के संकेत
फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वालर और न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स के हालिया बयान ने रेट कट की उम्मीदें मजबूत की हैं। हालांकि, अमेरिकी सरकार के शटडाउन से जुड़ी देरी के कारण कई महत्वपूर्ण डेटा अभी तक उपलब्ध नहीं हैं।
रेट कट का सोने पर प्रभाव
आमतौर पर ब्याज दरों में कटौती:
- बॉन्ड यील्ड को कम करती है
- डॉलर इंडेक्स पर दबाव डालती है
- सोने जैसे सेफ एसेट्स को आकर्षक बनाती है
यही कारण है कि विश्लेषक मानते हैं कि यदि फेड दिसंबर में रेट कट करता है, तो सोने की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
◆ चांदी में दिखी हल्की बढ़त
गोल्ड जहां गिरावट में रहा, वहीं चांदी की कीमतों में 27 नवंबर को उछाल देखने को मिला। MCX पर चांदी के दिसंबर फ्यूचर्स 2,663 रुपये चढ़कर ₹1,63,935 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का हाजिर भाव 0.9% गिरकर 52.89 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। यह दिखाता है कि चांदी में घरेलू और वैश्विक मूवमेंट अलग-अलग दिशा में दिखाई दिए।
◆ सोने और चांदी के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
मेहता इक्विटीज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटीज) राहुल कलंत्री के अनुसार:
Gold Important Levels:
- Support Zone: $4,130 प्रति औंस
- Resistance Zone: $4,200 प्रति औंस
Silver Important Levels:
- Support Zone: $52.65 प्रति औंस
- Resistance Zone: $53.90 प्रति औंस
कलंत्री के मुताबिक, सोने के लिए $4,200 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस है और इसे पार करना आसान नहीं होगा। अगर सोना इस लेवल को पार नहीं कर पाता, तो शॉर्ट-टर्म में कीमतों में फिर कमजोरी देखने को मिल सकती है।
◆ निवेश की रणनीति: अभी क्या करें?
वित्तीय विशेषज्ञ फिलहाल सोने में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं। बड़े और हाई-रिस्क वाले दांव लगाने का समय नहीं है।
⭐ आनंद राठी वेल्थ के जॉइंट CEO फिरोज अजीज की सलाह
- सोने में लंप-सम निवेश करने से बचें।
- SIP स्टाइल में धीरे-धीरे निवेश करें।
- 5–7 साल के लिए 9–11% CAGR से अधिक रिटर्न की उम्मीद न रखें।
- 1–2 साल में सोना अच्छा रिटर्न दे सकता है, लेकिन लंबी अवधि में औसत रिटर्न 10–14% के बीच रहता है।
अजीज ने कहा कि सोना तभी अच्छा प्रदर्शन करता है जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है। इसलिए इसे प्राथमिक निवेश नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो हेज के तौर पर देखें।
◆ किस रेंज में ट्रेड कर सकता है सोना?
रिद्धिसिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और IBJA के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार:
आने वाले समय में Gold Range:
- $4,000 – $4,200 प्रति औंस
- (₹1.21 लाख – ₹1.27 लाख प्रति 10 ग्राम)
Silver Range:
- $49 – $53 प्रति औंस
- (₹1.50 लाख – ₹1.60 लाख प्रति किलोग्राम)
कोठारी का मानना है कि बाजार पूरी तरह फेड रेट-कट पर निर्भर है। अगर दिसंबर में नरम रुख जारी रहा, तो सोने में तुरंत तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
◆ लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए क्या है मौका?
मौजूदा गिरावट लंबे अवधि के निवेशकों के लिए एंट्री पॉइंट साबित हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि यदि कोई 3–5 या 5–10 वर्षों का निवेश प्लान बना रहा है, तो फिजिकल गोल्ड या गोल्ड-बेस्ड फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश के लिए यह सही समय है।
निवेश के लोकप्रिय विकल्प:
- Sovereign Gold Bond (SGB) 2.5% वार्षिक ब्याज टैक्स-फ्री रिडेम्प्शन लंबी अवधि के लिए सबसे बेहतर
- Digital Gold पारदर्शी सुरक्षित कम मात्रा में निवेश संभव
- Gold ETFs कम शुल्क उच्च लिक्विडिटी
- फिजिकल गोल्ड (ज्वेलरी छोड़कर) बार या कॉइन का विकल्प सुरक्षित लॉकर में रखने की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि गोल्ड में गिरावट कभी भी खरीदारी का अवसर माना जाता है, लेकिन जरूरी है कि निवेश धीरे-धीरे किया जाए, ताकि कीमतें और गिरें तो औसत खरीद मूल्य कम हो सके।
◆ क्या आगे सोने में तेजी आएगी?
तेजी आएगी या नहीं, यह मुख्य रूप से इन 3 फैक्टर्स पर निर्भर करेगा:
1. फेड की दिसंबर मीटिंग का फैसला
अगर ब्याज दरों में कटौती होती है, तो सोने में हजारों रुपये की तेजी आ सकती है।
2. डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड
डॉलर कमजोर होता है, तो सोने की कीमतें बढ़ती हैं।
3. जियोपॉलिटिकल तनाव और ग्लोबल अनिश्चितता
विश्व स्तर पर किसी भी प्रकार का तनाव—युद्ध, मंदी की आशंका, बाजार गिरावट—सोने को सुरक्षित निवेश बनाता है।
अभी जो संकेत मिल रहे हैं, उनके आधार पर माना जा रहा है कि सोने में हल्की गिरावट के बाद एक बार फिर उछाल का दौर शुरू हो सकता है।
◆ नतीजा: निवेशकों को क्या करना चाहिए?
- शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को 4,130 डॉलर के सपोर्ट पर नजर रखनी चाहिए।
- लंबी अवधि के निवेशक गिरावट में धीरे-धीरे खरीदारी करें।
- SGB और Gold ETF जैसे विकल्प ज्यादा सुरक्षित और बेहतर हैं।
- लंप-सम निवेश से बचें।
- गोल्ड को पोर्टफोलियो का 10–15% हिस्सा ही रखें।
Source: Money Control


