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गल्फ का अगला 'ईरान' बन रहा है संयुक्त अरब अमीरात?

गल्फ राजनीति में UAE पर सवाल बढ़ रहे हैं। सोमालिया से समझौते रद्द, सूडान के आरोप और सऊदी से टकराव के बाद क्या UAE मुस्लिम दुनिया में अलग-थलग हो रहा है?

गल्फ का अगला 'ईरान' बन रहा है संयुक्त अरब अमीरात?

अगला 'ईरान' बन रहा है संयुक्त अरब अमीरात.!

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5:12 PM, Jan 13, 2026

O News हिंदी Desk

क्या गल्फ का अगला "ईरान" बन रहा है UAE? मुस्लिम देशों के बीच क्यों पड़ रहा अलग-थलग?

मध्य एशिया और अफ्रीका की भू-राजनीति तेज़ी से बदल रही है। बीते दशकों तक खुद को “मॉडर्न, बिज़नेस-फ्रेंडली और न्यूट्रल पावर” के रूप में प्रोजेक्ट करने वाला संयुक्त अरब अमीरात (UAE) आज एक ऐसी डगर पर चलता दिख रहा है जहां उसके पुराने सहयोगी और इस्लामी ब्लॉक के प्रमुख देश उससे दूरी बनाते नज़र आ रहे हैं। सवाल उठता है— क्या UAE उसी रास्ते पर बढ़ रहा है, जिस पर कभी ईरान चला था? यानी मजबूत क्षेत्रीय शक्ति से मुस्लिम दुनिया में धीरे-धीरे अलग-थलग पड़ने की राह!

यह सवाल अचानक नहीं उठा। इसके पीछे तीन हालिया घटनाक्रम सबसे बड़ा कारक बने— पहला, सोमालिया ने UAE से संबंध और समझौते रद्द कर दिए; दूसरा, सूडान ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में जनसंहार और मिलिशिया सपोर्ट का मामला दायर किया; तीसरा, यमन में सऊदी और UAE के बीच सामरिक टकराव अब छुपा नहीं।

इन तीन बिंदुओं ने ऐसी शक्ल ले ली है जो गल्फ पॉलिटिक्स को दो हिस्सों में तोड़ने की क्षमता रखती है।

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सोमालिया का बड़ा फैसला — सभी समझौते रद्द, सैनिक वापस

सबसे ताज़ा और अप्रत्याशित झटका सोमालिया की ओर से आया। मोगादिशू सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए UAE के साथ किए गए सभी सरकारी समझौते, जिनमें सैन्य अड्डे, इन्फ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक करार शामिल थे—रद्द कर दिए। सोमालिया सरकार का आधिकारिक तर्क है—

“देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा।”

सोमालिया का आक्षेप यह है कि UAE उसकी क्षेत्रीय संप्रभुता से खिलवाड़ कर रहा है और अलगाववादी ताकतों से समझौते कर रहा है।

मामला यहीं नहीं रुका। रिपोर्ट्स के अनुसार UAE ने बोसासो जैसे क्षेत्रों से अपने सैनिक और सैन्य उपकरण हटाने शुरू कर दिए, जिन्हें इथियोपिया भेजे जाने की बात सामने आई। इस बीच सोमालिया के भीतर मौजूद पंटलैंड प्रशासन ने केंद्र सरकार के फैसले को “गैरकानूनी” करार दिया। यानी एक ही देश के भीतर UAE पर दो तरह के रुख दिखे, जिसने घटना को और जटिल बना दिया।

यहाँ सबसे बड़ा मुद्दा है — सोमालिलैंड और इजराइल।

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सोमालिलैंड — इजराइल कनेक्शन और नया भू-राजनीतिक खेल

सोमालिया-UAE विवाद की जड़ सोमालिलैंड नाम का विवादित क्षेत्र है, जो खुद को स्वतंत्र देश मानता है लेकिन दुनिया में उसे मान्यता नहीं। हाल ही में इजराइल ने सोमालिलैंड की संप्रभुता को मान्यता दे दी — और यहीं से समीकरण बदल गया।

क्यों?

क्योंकि सोमालिलैंड का बेरबेरा बंदरगाह अदन की खाड़ी में स्थित है और यह हिंद महासागर के सबसे महत्वपूर्ण चोक पॉइंट्स में से एक को नियंत्रित करता है। UAE पहले से इस क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर और पोर्ट प्रोजेक्ट्स में निवेश कर चुका है। सोमालिया का आरोप है कि UAE इजराइल के साथ मिलकर क्षेत्रीय भू-राजनीति बदल रहा है, जिससे सोमालिया की भौगोलिक अखंडता को खतरा है।

सोमालिया की नाराजगी की वजहें—

✔ सोमालिलैंड से अलग सैन्य/व्यापारिक व्यवहार

✔ इजराइल की अचानक मान्यता

✔ बेरबेरा बंदरगाह का रणनीतिक उपयोग

✔ इथियोपिया-यूएई-इजराइल कनेक्शन का उभरना

यह घटनाक्रम इस्लामी दुनिया में UAE की उस छवि पर सवाल उठाता है जिसे वह दशकों से बचाकर रखता आया है — इस्लामी दुनिया का सुरक्षित सहयोगी।

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सूडान का सबसे गंभीर आरोप — “जनसंहार में सहयोग”

UAE को दूसरा बड़ा झटका सूडान से लगा, और यह सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि कानूनी है। सूडान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में UAE के खिलाफ केस दायर किया है, जिसमें कहा गया है कि—

UAE ने Rapid Support Forces (RSF) नाम की मिलिशिया को सैन्य, वित्तीय और राजनीतिक समर्थन दिया।

सूडान का दावा है कि RSF ने पश्चिमी दारफुर में मसालिट समुदाय पर जनसंहार किया है।

यह आरोप सिर्फ सैन्य समर्थन का नहीं, बल्कि एथनिक क्लीनिंग जैसे शब्दों से जुड़ा है—जो किसी भी देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को ध्वस्त कर सकते हैं।

UAE ने इसे “झूठ और राजनीतिक प्रचार” बताया, लेकिन मुस्लिम ब्लॉक के भीतर UAE की नैतिक वैधता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लग गया।

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यमन — सऊदी और UAE की खुली भिड़ंत

तेल, व्यापार और सुरक्षा के नाम पर सऊदी और UAE का गठबंधन अरब दुनिया में दशकों से प्रभावशाली रहा। लेकिन यमन ने इस गठबंधन की असल सच्चाई उजागर कर दी।

दिसंबर 2025 में सऊदी अरब ने UAE पर आरोप लगाए कि—

UAE यमन के अलगाववादी संगठन Southern Transitional Council (STC) को हथियार दे रहा है।

STC का उद्देश्य यमन को दो हिस्सों में बांटना है — उत्तर अलग, दक्षिण अलग। सऊदी के लिए यह “रेड लाइन” थी, क्योंकि उसका पूरा हस्तक्षेप “यमन को एकजुट रखने” की रणनीति पर आधारित था।

इसके बाद सऊदी समर्थित बलों ने—

✔ STC से कई इलाकों पर कब्जा किया

✔ उसके नेता एदरूस अल-जुबैदी को सत्ता ढांचे से बाहर किया

✔ UAE के प्रभाव को लगभग मिटा दिया

नतीजा? हूती विद्रोहियों के खिलाफ बना अरब गठबंधन टूट गया और UAE का एक बड़ा दांव उल्टा पड़ गया।

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तो क्या UAE ईरान की राह पर है?

यहाँ “ईरान की राह” से मतलब है—

✔ क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा

✔ अलग-थलग पड़ना

✔ अंतरराष्ट्रीय आरोप

✔ मुस्लिम ब्लॉक में दूरी

ईरान भी कभी मुस्लिम दुनिया में मजबूत साझेदार था, फिर उसकी क्षेत्रीय राजनीति + मिलिशिया सपोर्ट + इजराइल/अमेरिका से टकराव ने उसे ब्लॉक से दूर कर दिया।

आज UAE की स्थिति अलग है, क्योंकि—

✔ UAE इजराइल से खुले रिश्ते रखता है

✔ अमेरिका के करीब है

✔ आर्थिक रूप से बहुत मजबूत है

✔ उसके पास दुबई-अबूधाबी जैसा सॉफ्ट पावर है

लेकिन इसके बावजूद तथ्य ये भी हैं—

  1. सोमालिया अलग हुआ
  2. सूडान आरोप लगा चुका
  3. सऊदी के साथ खुला सामरिक टकराव
  4. इजराइल से नजदीकी मुस्लिम दुनिया में असहजता पैदा कर रही
  5. आर्थिक और सैन्य विस्तार अफ्रीका-गल्फ में विवाद बढ़ा रहा

इन संकेतों को अनदेखा करना मुश्किल है।

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मुस्लिम दुनिया में बढ़ती बेचैनी — असल वजहें क्या हैं?

✔ इजराइल फैक्टर — अब्राहम समझौते के बाद से UAE ने इजराइल के साथ संपर्क बढ़ाया। सूडान, सोमालिया जैसे देशों में इसे “विश्वासघात” की तरह देखा जा रहा है।

✔ अफ्रीका में सैन्य विस्तार — Eritrea, Ethiopia, Libya, Sudan, Somalia — कई जगह UAE मिलिशिया/राजनीतिक ब्लॉक्स में निवेश कर रहा है।

✔ इंडो-पैसिफिक और हिंद महासागर रणनीति — Berbera, Assab, Aden — ये सिर्फ बंदरगाह नहीं, बल्कि चोक पॉइंट हैं। यह पश्चिमी मुस्लिम देशों को असहज करता है।

✔ ताकत की स्वतंत्र राजनीति — UAE न तो सऊदी की लाइन ले रहा है, न तुर्की-कतर ब्लॉक की। यह उसके लिए अवसर भी है और खतरा भी।

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UAE का पलटवार नैरेटिव — “हम अलग-थलग नहीं, प्रभावशाली हैं!”

UAE के नजरिए से तस्वीर कुछ और है—

✔ अफ्रीका में निवेश = “स्टेबिलिटी मॉडल”

✔ इजराइल से संबंध = “नॉर्मलाइजेशन”

✔ यमन में दखल = “इम्पोर्टेंस ऑफ मैरीटाइम सिक्योरिटी”

✔ बिजनेस हब = “ओपन इकॉनॉमी विज़न 2030”

लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति इरादों से नहीं, नैरेटिव और घटनाक्रमों से तय होती है।

और यही नैरेटिव आज सवाल पूछ रहा है— क्या UAE इस्लामी दुनिया से दूर जा रहा है?

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भविष्य का सवाल — अलगाव या रणनीति?

आने वाला समय तीन संकेत देगा— 1. सऊदी का रुख अगर सऊदी और UAE का मतभेद यमन से आगे बढ़ा, तो अरब दुनिया दो ध्रुव में टूट सकती है।

2. अफ्रीका में UAE का विस्तार सोमालिया के बाद अगर सूडान, इरीट्रिया या इथियोपिया में समीकरण बदले, तो UAE को और झटके लगेंगे।

3. इजराइल की भूमिका अगर इजराइल सोमालिलैंड मॉडल को आगे बढ़ाता है, तो यह मुस्लिम दुनिया में नई भू-राजनीतिक जंग खोलेगा।

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निष्कर्ष

UAE अभी ईरान नहीं बना है। लेकिन उसके कदम वही सवाल खड़े कर रहे हैं, जो कभी ईरान पर उठे थे—

✔ क्या वह क्षेत्रीय शक्ति खेल में ओवरस्ट्रेच कर रहा है?

✔ क्या अफ्रीका-गल्फ में उसके दुश्मन बढ़ रहे हैं?

✔ क्या मुस्लिम दुनिया उसे “अपने ब्लॉक” का हिस्सा मानती भी है?

सच्चाई यह है कि गल्फ की राजनीति बदल रही है, और इस बार खेल तेल का नहीं— बंदरगाहों, समुद्री चोक पॉइंट्स, इजराइल और अफ्रीका के भू-राजनीतिक नक्शे पर आधारित है।

आने वाले महीनों में साफ होगा कि UAE “नई शक्ति” के रूप में उभरता है या “नया ईरान” बनकर मुस्लिम दुनिया में अलग-थलग पड़ जाता है।

Source: TV9

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