JNU News: ब्राह्मण विरोधी नारेबाजी मामले में परशुराम दल ने दर्ज कराई प्राथमिकी, जानें क्या है पूरा विवाद?
"JNU में ब्राह्मण विरोधी नारेबाजी और पुतला दहन मामले ने पकड़ा तूल। परशुराम दल ने वसंत कुंज थाने में दर्ज कराई FIR। जानें साबरमती हॉस्टल के सामने हुई इस घटना का पूरा सच, परशुराम दल की चेतावनी और पुलिस की जांच रिपोर्ट। जेएनयू विवाद की हर अपडेट के लिए पढ़ें पूरी खबर।"

जेएनयू में ब्राह्मण विरोधी नारेबाज़ी का आरोप, परशुराम दल ने दर्ज कराई FIR
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12:38 PM, Feb 4, 2026
O News हिंदी Desk
JNU में फिर भड़की विवाद की चिंगारी: ब्राह्मण विरोधी नारेबाजी पर 'परशुराम दल' हमलावर, वसंत कुंज थाने में FIR दर्ज
नई दिल्ली: अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता से अधिक वैचारिक टकरावों के लिए चर्चा में रहने वाला जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला जातिगत नारेबाजी और अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। परिसर में कथित तौर पर "ब्राह्मणवाद" के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगा है, जिसके बाद दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज थाने में औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल विश्वविद्यालय प्रशासन बल्कि राजधानी की पुलिस और सामाजिक संगठनों को भी अलर्ट मोड पर ला दिया है।
क्या है पूरा मामला? (The Core Conflict)
घटनाक्रम की शुरुआत 29 जनवरी से जुड़ी बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद जेएनयू के साबरमती हॉस्टल के पास छात्रों के एक समूह द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा था। आरोप है कि इस विरोध प्रदर्शन की आड़ में कुछ "असामाजिक तत्वों" ने ब्राह्मण समुदाय को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक नारेबाजी की।
परशुराम दल, जो एक पंजीकृत राष्ट्रीय क्रांतिकारी ब्राह्मण संगठन है, का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने न केवल "ब्राह्मणवाद" का पुतला फूंका, बल्कि पूरे समुदाय के विरुद्ध गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। संगठन का कहना है कि यह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं, बल्कि एक विशेष समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने की साजिश है।
परशुराम दल का कड़ा रुख: "अब बर्दाश्त नहीं होगा अपमान"
इस घटना के विरोध में 'परशुराम दल' के राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगाधर शर्मा के नेतृत्व में दर्जनों पदाधिकारी वसंत कुंज थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत देते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
गंगाधर शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
"जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह की घटना होना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह पहली बार नहीं है जब सवर्ण समाज या ब्राह्मणों को निशाना बनाया गया हो। कैंपस के भीतर देश विरोधी और समाज को बांटने वाली ताकतें सक्रिय हैं, जिन्हें प्रशासन का मूक समर्थन प्राप्त है। हम कानून के दायरे में रहकर न्याय की मांग कर रहे हैं।"
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FIR में शामिल प्रमुख बिंदु:
- सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश: शिकायत में कहा गया है कि ऐसी नारेबाजी से समाज में आपसी भाईचारा खत्म होता है।
- धार्मिक और जातिगत भावनाएं आहत करना: पुतला फूंकने और अपशब्दों के इस्तेमाल को आईपीसी की सुसंगत धाराओं के तहत अपराध बताया गया है।
- प्रशासन की विफलता: संगठन ने जेएनयू प्रशासन पर सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
जेएनयू और विवादों का पुराना नाता
जेएनयू में जातिगत टिप्पणी का यह कोई नया मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कैंपस की दीवारों पर "ब्राह्मणों कैंपस छोड़ो" जैसे नारे लिखे जाने की घटनाएं भी सामने आई थीं, जिस पर भारी बवाल हुआ था।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेएनयू में 'विचारधारा की लड़ाई' अक्सर व्यक्तिगत और जातिगत हमलों में तब्दील हो जाती है। जहाँ एक पक्ष इसे "पितृसत्ता और जातिवाद के विरुद्ध संघर्ष" बताता है, वहीं दूसरा पक्ष इसे "हिंदू समाज को विभाजित करने वाली वामपंथी साजिश" करार देता है।
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आंदोलन की चेतावनी और पुलिस की जांच
परशुराम दल ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि पुलिस ने इस मामले में ढिलाई बरती, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष कैलाश प्रधान और महामंत्री गोपाल दीक्षित ने संयुक्त बयान में कहा कि विश्वविद्यालय परिसर को नफरत का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा।
वसंत कुंज थाना पुलिस के अनुसार, शिकायत प्राप्त हो गई है और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की पड़ताल कर रही है ताकि नारेबाजी करने वाले संदिग्धों की पहचान की जा सके।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख चेहरा:
इस विरोध प्रदर्शन और शिकायत दर्ज कराने के दौरान निखिल भारद्वाज (प्रदेश सचिव), गोविंद शर्मा, यश शर्मा और आशंकर शर्मा सहित बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
निष्कर्ष: क्या कैंपस में वैचारिक मतभेद अब व्यक्तिगत दुश्मनी बन रहे हैं?
जेएनयू की इस ताजा घटना ने एक बार फिर अकादमिक जगत में "अभिव्यक्ति की मर्यादा" पर बहस छेड़ दी है। किसी नीति का विरोध करना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन क्या उस विरोध में किसी जाति या समुदाय को अपमानित करना जायज है? यह सवाल आज हर जागरूक नागरिक के मन में है।
विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष आंतरिक जांच बैठानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और कैंपस के भीतर शैक्षणिक माहौल बना रहे।
जेएनयू विवाद से जुड़े अहम सवाल
1. जेएनयू में ताजा विवाद किस बात को लेकर है?
यह विवाद 29 जनवरी को साबरमती हॉस्टल के सामने ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ कथित तौर पर की गई नारेबाजी और पुतला दहन को लेकर है।
2. FIR किसने और कहाँ दर्ज कराई है?
FIR 'परशुराम दल' (राष्ट्रीय क्रांतिकारी ब्राह्मण संगठन) द्वारा दिल्ली के वसंत कुंज थाने में दर्ज कराई गई है।
3. परशुराम दल की मुख्य मांग क्या है?
संगठन की मांग है कि नारेबाजी करने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
4. क्या पुलिस ने किसी को गिरफ्तार किया है?
फिलहाल पुलिस जांच कर रही है और दोषियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। अभी तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
Source: Onewshindi


