JNU में निशाने पर Nationalist Students? प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल तेज
JNU में ABVP छात्रों पर ₹19,000 फाइन और रस्टिकेशन का आरोप। छात्र बोले—राष्ट्रवादी आवाज़ दबाने की कोशिश! JNUSU और प्रशासन पर गंभीर सवाल।

JNU में निशाने पर Nationalist Students?
delhi
2:25 PM, Jan 10, 2026
O News हिंदी Desk
JNU में नया बवाल: ‘अन्होली नेक्सस’ का खुलासा, JNU Admin और ‘निक्कम्मी’ JNUSU पर गंभीर आरोप!
देश की राजधानी दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर से सुर्खियों में है — लेकिन इस बार वजह है एक ऐसा ‘Unholy Nexus’ जिसने कैंपस की असल तस्वीर को उजागर कर दिया है। छात्रों का आरोप है कि JNU Administration और निक्कम्मी JNUSU मिलकर कैंपस में राष्ट्रवाद की आवाज को दबाने का काम कर रहे हैं।
JNUSU की भूमिका पर सवाल
JNU छात्र संगठन JNUSU पर आरोप है कि पिछले कई महीनों से यह संगठन छात्र मुद्दों से भागता रहा है। न हॉस्टल, न मेस और न ही अकादमिक विषय—किसी पर भी JNUSU ने कोई सार्थक पहल नहीं की। उसके उलट, JNUSU पर यह भी आरोप है कि ये वही समूह है जो ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ जैसे विवादित नारेबाजों के लिए ढाल बनकर खड़ा दिखाई देता है।
प्रशासन की ‘Selective Targeting’ पर आक्रोश
सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है JNU Administration की कार्रवाई पर। छात्रों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने जानबूझकर एकतरफा कार्रवाई करते हुए:
✔ राष्ट्रवादी छात्रों पर ₹19,000 का भारी जुर्माना ठोंक दिया
✔ 8–10 छात्रों को रस्टिकेट किया
✔ उनकी डिग्री रोक दी, जिससे सरकारी नौकरियों के मौके हाथ से निकल गए
यह भी कहा जा रहा है कि जिन छात्रों पर कार्रवाई हुई, वे वही छात्र हैं जो वंदे मातरम और भारत माता की जय जैसे राष्ट्रवादी नारे लगाते हैं और कैंपस में एंटी-नेशनल नैरेटिव का विरोध करते आए हैं।
JNU
“नेशनलिज़्म” की बात, लेकिन नेशनलिस्ट पर कार्रवाई?
यह सवाल भी लगातार गूंज रहा है कि जिस विश्वविद्यालय में प्रशासन खुद को “राष्ट्रवादी” बताने की कोशिश करता है, वही प्रशासन कैसे उन छात्रों को टारगेट कर रहा है जो खुले तौर पर भारत की अखंडता और संवैधानिक मूल्यों के समर्थन में खड़े होते हैं?
छात्रों ने आरोप लगाया:
“प्रशासन कहता है कि वह राष्ट्रवाद का समर्थन करता है, लेकिन जब हम वंदे मातरम बोलते हैं तो हम पर फाइन और रस्टिकेशन लगा दिया जाता है। यह कैसी राष्ट्रवाद की परिभाषा है?”
‘दमन से डरने वाले नहीं’ — छात्रों का जवाब
रस्टिकेशन और फाइन के बावजूद, ABVP से जुड़े छात्र नेताओं ने साफ कहा कि:
“न तो जुर्माना, न डर और न धमकी… हम राष्ट्रवाद की आवाज को दबने नहीं देंगे! निक्कम्मी JNUSU और पक्षपाती प्रशासन के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी!”
निष्कर्ष
JNU जैसे संस्थान से उम्मीद थी कि यह विचारों के स्वस्थ आदान-प्रदान का केंद्र बनेगा, लेकिन मौजूदा घटनाओं ने एक गहरी वैचारिक खाई को उजागर कर दिया है — जहाँ एक ओर राष्ट्रवादी आवाज़ें दमन का शिकार हो रही हैं, वहीं JNUSU जैसे संगठन एंटी-नेशनल नैरेटिव को सुविधाजनक चुप्पी से शक्ति दे रहे हैं।
📍 डिस्क्लेमर (Disclaimer):
इस रिपोर्ट में उल्लिखित घटनाएँ, आरोप और बयान संबंधित पक्षों और छात्र संगठनों द्वारा दिए गए दावों पर आधारित हैं। O News Hindi किसी भी तरह के राजनीतिक संगठन, समूह या प्रशासनिक पक्ष का प्रतिनिधित्व नहीं करता। हमारा उद्देश्य केवल जानकारी और जन-सरोकार के मुद्दों को निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से प्रस्तुत करना है।
Source: JNU fdlfjlsajfdlsdaj


