असम में बहुविवाह बैन! हिमंत बोले— अगली बार सरकार बनी तो UCC लागू करेंगे!
असम विधानसभा ने बहुविवाह प्रतिबंध बिल पास किया। दोषियों को 10 साल की सजा का प्रावधान। CM हिमंत बोले— अगली सरकार बनने पर UCC और लव-जिहाद कानून भी लाएंगे।

असम में बहुविवाह बैन!
delhi
8:02 PM, Nov 27, 2025
O News हिंदी Desk
असम में बहुविवाह पर कड़ा प्रहार: विधानसभा से बिल पास, CM हिमंत बोले— “अगली बार सरकार बनी तो UCC भी लागू करेंगे”
असम की राजनीति और सामाजिक ढांचे में गुरुवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। विधानसभा में ‘असम बहुविवाह निषेध विधेयक, 2025’ भारी समर्थन के साथ पास हो गया, जिसके बाद राज्य ने बहुविवाह के खिलाफ कानूनी लड़ाई में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। नए कानून के तहत बहुविवाह को अब आपराधिक कृत्य माना जाएगा, और दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान जोड़ा गया है। साथ ही यह भी साफ कर दिया गया है कि एसटी समुदाय और छठी अनुसूची वाले क्षेत्र इस कानून से बाहर रहेंगे।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बिल को महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने सदन में घोषणा की कि अगर अगले विधानसभा चुनावों के बाद उनकी सरकार दोबारा बनती है, तो पहले सत्र में ही यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने का बिल लाया जाएगा। इसके अलावा, फरवरी तक लव-जिहाद और धोखाधड़ी पर आधारित विवाह को रोकने के लिए एक अलग कानून लाए जाने की भी बात उन्होंने कही।
कानून का दायरा: किन पर लागू होगा और कौन रहेगा बाहर?
नए विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि यह कानून राज्य के लगभग सभी समुदायों पर लागू होगा। हालांकि, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल जनजातीय क्षेत्र और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय को इससे बाहर रखा गया है। इसका उद्देश्य उनके पारंपरिक सामाजिक ढांचे और रीति-रिवाजों को प्रभावित होने से बचाना है।
सरकार का दावा है कि बिल का लक्ष्य किसी विशेष धर्म को निशाना बनाना नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सभी समुदायों में समानता स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री सरमा का बयान: “इसे इस्लाम-विरोधी बताना गलत”
विधेयक पर सदन में जब चर्चा हुई, तो कई विपक्षी नेताओं ने इसे धार्मिक आधार पर पक्षपातपूर्ण बताने की कोशिश की। इस पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
- “बहुविवाह केवल मुस्लिम समाज में नहीं, बल्कि हिंदू समाज में भी कई उदाहरण मिलते हैं।”
- “यह बिल धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ है।”
- “हम चाहते हैं कि महिलाओं को हर धार्मिक और सामाजिक दायरे में समान सम्मान और सुरक्षा मिले।”
सरमा ने विपक्ष से यह भी आग्रह किया कि वे अपने संशोधन प्रस्ताव वापस लें, ताकि पूरा सदन एकजुट होकर महिलाओं की सुरक्षा की दिशा में मजबूत संदेश दे सके।
विपक्ष ने जताई आपत्ति, सरकार ने बताया सामाजिक सुधार
सरकार की अपील के बावजूद AIUDF और CPI(M) ने अपने संशोधन प्रस्ताव वापस नहीं लिए। जब बिल पर वोटिंग हुई तो उनके प्रस्तावों को आवाज मत से खारिज कर दिया गया।
विपक्ष का कहना था कि बिल के कुछ प्रावधानों की कानूनी स्पष्टता नहीं है और इससे कुछ समुदायों पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, सरकार ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि:
- यह महिलाओं की सुरक्षा का विषय है
- यह सामाजिक सुधार की दिशा में आवश्यक कदम है
- यह कानून समाज में समानता स्थापित करने के लिए जरूरी है
UCC लागू करने का वादा: “अगली बार सरकार बनी तो पहला काम यही होगा”
बिल पर हुई बहस के दौरान मुख्यमंत्री सरमा ने भविष्य की दिशा भी साफ कर दी। उन्होंने कहा:
- “अगले विधानसभा चुनावों के बाद यदि जनता हमें एक और कार्यकाल देती है, तो नया सत्र शुरू होते ही असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया जाएगा।”
- “बहुविवाह पर यह रोक UCC के रास्ते का एक महत्वपूर्ण चरण है।”
सरमा ने यह भी कहा कि UCC लागू होने से विवाह, तलाक, गोद लेना और संपत्ति जैसे मुद्दों पर सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनेगा, जिससे सामाजिक न्याय को मजबूती मिलेगी।
फरवरी तक लव-जिहाद पर नया कानून
सरकार ने आगामी महीनों के लिए अपनी कानूनी योजना भी स्पष्ट की। मुख्यमंत्री ने बताया कि फरवरी तक ‘धोखाधड़ी, पहचान छुपाकर और दबाव/प्रलोभन देकर किए जाने वाले विवाह’ पर रोक लगाने के लिए एक अलग कानून लाया जाएगा। इस कानून का उद्देश्य है:
- पहचान छुपाकर शादी करने पर रोक
- धार्मिक रूपांतरण के नाम पर ठगी को रोकना
- महिलाओं को धोखे से की गई शादी के दुष्परिणामों से बचाना
सरकार का कहना है कि असम में “लव-जिहाद जैसी गतिविधियों” को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महिलाओं की सुरक्षा और समानता को बताया मुख्य मकसद
सरमा सरकार का दावा है कि इस बिल को लाने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं में सुरक्षा और आत्मविश्वास बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि:
- कई महिलाएं बहुविवाह के कारण मानसिक, सामाजिक और आर्थिक उत्पीड़न झेलती हैं।
- एक ही पुरुष द्वारा कई शादियां किए जाने से परिवार और बच्चों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
- महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए कड़े कानून जरूरी हो जाते हैं।
सरमा ने इसे "महिलाओं के हित में सबसे बड़े सामाजिक सुधारों में से एक" बताया।
बिल के मुख्य प्रावधान (संक्षेप में)
- बहुविवाह अपराध घोषित
- दोषी को 10 साल तक की जेल
- कानून सभी समुदायों पर लागू, ST और छठी अनुसूची वाले क्षेत्र बाहर
- एक से अधिक शादी करने के लिए सख्त दंडात्मक प्रावधान
- जांच और प्रक्रिया को लेकर विशेष दिशानिर्देश भी शामिल
असम में बदलता सामाजिक ढांचा
इस बिल के पारित होने के बाद सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि असम देश का वह राज्य बन सकता है जहाँ व्यक्तिगत कानूनों और विवाह संबंधी कानून में बड़े बदलवा सबसे पहले जमीन पर दिखेंगे।
असम पहले ही कई कड़े कदम उठाकर सुर्खियों में रहा है — जैसे:
- बाल विवाह पर कठोर कार्रवाई
- धार्मिक रूपांतरण पर लगातार निगरानी
- महिलाओं से जुड़े अपराधों पर शून्य सहिष्णुता
बहुविवाह पर प्रतिबंध इसी श्रृंखला की अगली कड़ी है।
राजनीतिक दृष्टि से भी बड़ा कदम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
- यह बिल भाजपा की समाज सुधार बनाम appeasement वाली राजनीति की दिशा को और मजबूत करता है।
- UCC लागू करने की घोषणा चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।
- विपक्ष के संशोधनों के खारिज होने से सरकार की स्थिति और मजबूत दिखाई दी।
असम में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव हैं, और इससे पहले ऐसे कानून सरकार के राजनीतिक एजेंडे को भी प्रभावित करेंगे।
निष्कर्ष: असम में बड़ा कानूनी बदलाव, आगे और भी बड़े कदम की तैयारी
बहुविवाह पर प्रतिबंध का बिल पास होने के साथ असम ने समता, महिलाओं की सुरक्षा और कानून के समान अनुपालन की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। सरकार का अगला लक्ष्य UCC लागू करना और फरवरी तक लव-जिहाद पर सख्त कानून लाना है।
इस कदम को समर्थक “सामाजिक सुधार” करार दे रहे हैं, जबकि विरोधियों का कहना है कि इसे अधिक स्पष्टता और न्यायिक अध्ययन की जरूरत है। लेकिन इतना तय है कि इस विधेयक ने असम की राजनीति और सामाजिक व्यवस्था में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
Source: Amar Ujala


