Republic Day 2026: CRPF AC Vipin Wilson को शौर्य चक्र, जानें मणिपुर के जीरीबाम हमले की वो खौफनाक दास्तान
मणिपुर की वो खौफनाक दोपहर, जब पुलिस स्टेशन को घेर चुके थे भारी हथियारों से लैस उग्रवादी! तब CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट विपिन विल्सन ने कैसे अपनी जान पर खेलकर टाला था भीषण नरसंहार? शौर्य चक्र विजेता जांबाज की बहादुरी की पूरी दास्तान यहाँ पढ़ें।

CRPF AC Vipin Wilson को शौर्य चक्र
नई दिल्ली/इंफाल
1:25 PM, Jan 26, 2026
O News हिंदी Desk
गणतंत्र दिवस 2026: मणिपुर में 'काल' बने उग्रवादियों के सामने दीवार बने AC विपिन विल्सन, मिला शौर्य चक्र
नई दिल्ली/इंफाल: 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर जब पूरा देश तिरंगे के सम्मान में झुका था, तब वीरता की एक ऐसी गाथा गूँज रही थी जिसने मणिपुर की अशांत वादियों में मानवता और देश की रक्षा की नई मिसाल पेश की। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के असिस्टेंट कमांडेंट (AC) विपिन विल्सन को उनके अदम्य साहस और सूझबूझ के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है।
यह सम्मान केवल एक मेडल नहीं, बल्कि उस खौफनाक मंजर की गवाही है जब 11 नवंबर 2024 को मणिपुर के जीरीबाम जिले में मौत तांडव कर रही थी और विल्सन की टीम ने अपनी जान पर खेलकर सैकड़ों मासूमों को बचाया था।
वो काली दोपहर: जब जीरीबाम गोलियों की गूँज से दहल उठा
मणिपुर में जातीय हिंसा की आग लंबे समय से सुलग रही थी, लेकिन 11 नवंबर 2024 का दिन जीरीबाम के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हो गया। सुबह के करीब 4 बजे थे, जब सैन्य वेशभूषा में आए कुकी उग्रवादियों ने बोरोबेकड़ा सब-डिवीजन में हिंदू मैतेई बस्तियों को निशाना बनाना शुरू किया।
उग्रवादियों का इरादा सिर्फ हमला करना नहीं, बल्कि इलाके को राख कर देना था। उन्होंने घरों, सार्वजनिक प्रतीक्षालयों और स्थानीय क्लबों को आग के हवाले कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, हमलावर अत्याधुनिक हथियारों और विस्फोटकों से लैस थे। दोपहर होते-होते स्थिति और भी भयावह हो गई जब ऑटो-रिक्शा में भरकर आए उग्रवादियों ने दुकानों और घरों में सुनियोजित तरीके से आगजनी शुरू की।
बोरोबेकड़ा पुलिस स्टेशन: मौत के मुहाने पर खड़े थे मासूम
उस समय बोरोबेकड़ा पुलिस स्टेशन और पास की CRPF पोस्ट (जकुराधोर) केवल सुरक्षा चौकियां नहीं थीं, बल्कि वे उन सैकड़ों हिंदू मैतेई परिवारों का अंतिम सहारा थीं, जो अपनी जान बचाकर वहां शरण लिए हुए थे। विस्थापित बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे अंदर सहमे हुए थे, और बाहर उग्रवादियों का हुजूम पुलिस स्टेशन को घेर चुका था।
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AC विपिन विल्सन का अदम्य साहस: 45 मिनट की वो भीषण मुठभेड़
यहीं से शुरू होती है असिस्टेंट कमांडेंट विपिन विल्सन और CRPF की 20वीं बटालियन की क्विक एक्शन टीम (QAT) की वीरता की कहानी। जैसे ही उग्रवादियों ने पुलिस स्टेशन पर सीधा हमला बोला, विल्सन ने मोर्चा संभाला।
- नेतृत्व: भारी गोलीबारी के बीच विल्सन ने अपनी टीम को इस तरह तैनात किया कि उग्रवादी सुरक्षा घेरे को तोड़ न सकें।
- रणनीति: उग्रवादी ऊंचाई और रिहायशी छिपने की जगहों का फायदा उठा रहे थे, लेकिन विल्सन के सटीक निर्देशों ने उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
- नतीजा: लगभग 40 से 45 मिनट तक चली इस आमने-सामने की मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 10 उग्रवादियों को ढेर कर दिया।
इस ऑपरेशन में CRPF के एक जांबाज कांस्टेबल संजीव कुमार गोली लगने से घायल हुए, जिन्हें तुरंत एयरलिफ्ट कर असम के सिलचर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। विल्सन की इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल पुलिस स्टेशन को गिरने से बचाया, बल्कि वहां शरण लिए हुए सैकड़ों नागरिकों के नरसंहार को भी रोक दिया।
हथियारों का जखीरा: उग्रवादियों की बड़ी साजिश का खुलासा
मुठभेड़ के बाद जब तलाशी अभियान चलाया गया, तो बरामद हुए हथियारों ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए। यह किसी छोटी झड़प की तैयारी नहीं थी, बल्कि एक बड़े युद्ध का सामान था:
- 3 AK राइफलें
- 4 SLR और 2 INSAS राइफलें
- 1 RPG (रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड)
- बम, विस्फोटक और भारी मात्रा में गोला-बारूद
- बुलेटप्रूफ हेलमेट और अन्य सैन्य उपकरण
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इन हथियारों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण थी कि विल्सन और उनकी टीम ने कितनी बड़ी तबाही को समय रहते कुचल दिया।
हिंसा का दुखद पहलू: मासूमों का अपहरण और हत्या
जहां एक तरफ CRPF ने हमला नाकाम किया, वहीं दूसरी तरफ हिंसा के उस दौर में कुछ ऐसी घटनाएं भी हुईं जिन्होंने पूरे देश की आत्मा को झकझोर दिया। उसी दिन, दो वृद्ध मैतेई पुरुषों के शव मिले और एक ही परिवार के छह सदस्यों—जिनमें 60 वर्ष की बुजुर्ग महिला से लेकर मात्र 8 महीने का मासूम बच्चा तक शामिल था—का अपहरण कर लिया गया, जिनकी बाद में हत्या कर दी गई।
जीरीबाम के इस जख्म को भरने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाए। पूरे जिले में कर्फ्यू लगाया गया और मामले की गंभीरता को देखते हुए NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को जांच सौंपी गई।
क्यों मिला शौर्य चक्र? आधिकारिक उद्धरण
गणतंत्र दिवस 2026 पर जारी आधिकारिक प्रशस्ति पत्र में एसी विपिन विल्सन की जमकर सराहना की गई है। सरकार ने माना कि विल्सन ने "असाधारण साहस, कर्तव्य के प्रति नि:स्वार्थ समर्पण और प्रेरक नेतृत्व" का प्रदर्शन किया।
"अत्यधिक जोखिम भरे वातावरण में, जहां एक तरफ बेगुनाह नागरिकों की भीड़ थी और दूसरी तरफ आधुनिक हथियारों से लैस उग्रवादी, वहां विल्सन ने शांत दिमाग और फौलादी इरादों से स्थिति को संभाला।"
मणिपुर संघर्ष: शांति की ओर एक कठिन रास्ता
मणिपुर में हिंदू मैतेई और मुख्य रूप से ईसाई कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष ने राज्य की सामाजिक संरचना को गहरी चोट पहुंचाई है। ऐसे माहौल में सुरक्षा बलों की भूमिका न केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने की है, बल्कि निष्पक्षता के साथ हर नागरिक की जान बचाने की भी है।
असिस्टेंट कमांडेंट विपिन विल्सन जैसे अधिकारी यह संदेश देते हैं कि वर्दी के लिए कोई धर्म या समुदाय बड़ा नहीं होता, उसके लिए सबसे बड़ा धर्म 'मानवता की रक्षा' है।
निष्कर्ष: एक नायक का सम्मान
असिस्टेंट कमांडेंट विपिन विल्सन को मिला शौर्य चक्र उन सभी जवानों को समर्पित है जो पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों में अपनी जान की परवाह किए बिना तैनात हैं। यह वीरता पुरस्कार जीरीबाम के उन परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जिन्होंने उस दिन अपनी आंखों के सामने मौत को देखा था।
आज देश विपिन विल्सन की बहादुरी को सलाम कर रहा है, क्योंकि अगर उस दिन उन्होंने और उनकी QAT टीम ने हिम्मत न दिखाई होती, तो 11 नवंबर 2024 का इतिहास कुछ और ही होता।
Source: O News हिंदी


