"गरीबों की मौज, डॉक्टरों की शामत? बिहार स्वास्थ्य विभाग में रातों-रात बदल गए नियम!"
"Bihar Government News: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बड़ा फैसला, अब सरकारी डॉक्टर नहीं कर सकेंगे निजी प्रैक्टिस। समृद्धि यात्रा के दौरान सीएम ने स्वास्थ्य विभाग को दिए सख्त निर्देश। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।"

"गरीबों की मौज, डॉक्टरों की शामत?
बिहार
5:54 PM, Jan 16, 2026
O News हिंदी Desk
बिहार में अब सरकारी डॉक्टर नहीं चला पाएंगे 'निजी दुकान', नीतीश सरकार का बड़ा फैसला
पटना: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी चर्चा लंबे समय से हो रही थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के सरकारी डॉक्टर अब प्राइवेट प्रैक्टिस (Private Practice) नहीं कर सकेंगे। 'समृद्धि यात्रा' के दौरान पश्चिमी चंपारण पहुंचे सीएम ने स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में सख्त नीति बनाने और उसे तुरंत लागू करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
अक्सर यह शिकायतें मिलती रही हैं कि सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर ड्यूटी के घंटों के दौरान या उसके बाद निजी क्लीनिकों और बड़े प्राइवेट अस्पतालों में समय देते हैं। इससे सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब मरीजों को सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता। नीतीश कुमार ने इसी 'दोहरी व्यवस्था' को खत्म करने का मन बना लिया है।
सीएम नीतीश ने साफ शब्दों में कहा:
"सरकारी डॉक्टरों की पहली और पूरी जिम्मेदारी आम जनता के प्रति है। इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मरीजों का इलाज सरकारी अस्पतालों में ही पूरी निष्ठा से होना चाहिए।"
नई नीति की 3 बड़ी बातें
नीतीश कुमार ने अधिकारियों को जो निर्देश दिए हैं, उसके आधार पर नई स्वास्थ्य नीति में ये बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
- पूर्ण प्रतिबंध: सरकारी सेवा में रहते हुए निजी क्लीनिक या अस्पताल में प्रैक्टिस करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
- सख्त कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि उनकी सेवा पर भी गाज गिर सकती है।
- उपलब्धता पर जोर: इस फैसले का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डॉक्टर अपने निर्धारित समय पर सरकारी अस्पताल में ही मौजूद रहें।
आम जनता को क्या होगा फायदा?
बिहार के स्वास्थ्य ढांचे में इस सुधार को एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' की तरह देखा जा रहा है। इसके कुछ मुख्य लाभ इस प्रकार होंगे:
- बेहतर इलाज: सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ेगी।
- गरीबों को राहत: जो मरीज प्राइवेट की भारी फीस नहीं भर सकते, उन्हें सरकारी केंद्रों पर ही वरिष्ठ डॉक्टरों की सलाह मिल सकेगी।
- जवाबदेही: अस्पतालों के प्रबंधन में सुधार होगा और डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित होगी।
डॉक्टरों के संगठनों की प्रतिक्रिया पर टिकी नजरें
बिहार में पहले भी इस तरह के प्रयासों का विरोध होता रहा है। राज्य के अधिकांश बड़े डॉक्टर पटना और अन्य शहरों में अपने निजी क्लीनिक चलाते हैं। ऐसे में IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) और अन्य डॉक्टर संगठन इस फैसले को कैसे लेते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या सरकार डॉक्टरों को इसके बदले कोई विशेष 'नॉन-प्रैक्टिस अलाउंस' (NPA) देगी? यह सवाल अभी बना हुआ है।
निष्कर्ष: नीतीश कुमार का यह फैसला साहसिक है, लेकिन इसकी सफलता इसके क्रियान्वयन (Implementation) पर निर्भर करेगी। अगर जमीन पर यह सख्ती से लागू हुआ, तो बिहार के सरकारी अस्पतालों की तस्वीर सच में बदल सकती है।
क्या आपको लगता है कि प्राइवेट प्रैक्टिस बंद होने से बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधरेगी? अपनी राय हमें कमेंट में बताएं।
Source: NBT


