गाजा युद्ध में UAE का 'डबल गेम' आया सामने, लीक दस्तावेज ने खोली इजराइल की मदद की पोल!
"गाजा युद्ध के बीच एक बड़ा सनसनीखेज खुलासा हुआ है। लीक सरकारी दस्तावेजों (Emirati Leaks) के अनुसार, UAE रेड सी स्थित अपने सैन्य ठिकानों से इजराइल को सीधी सैन्य और खुफिया मदद पहुंचा रहा है। इस रिपोर्ट में 1 अरब डॉलर की खुफिया डील और कतर-कुवैत पर लगे गंभीर आरोपों का भी जिक्र है। पढ़ें अरब जगत को हिला देने वाली यह पूरी खबर।"

गाजा युद्ध में UAE का 'डबल गेम'
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1:03 PM, Jan 14, 2026
O News हिंदी Desk
गाजा युद्ध में इजराइल का 'सीक्रेट पार्टनर' बना UAE? लीक दस्तावेज ने अरब जगत में मचाया हड़कंप
नई दिल्ली/दुबई: मध्य पूर्व (Middle East) की राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने अरब देशों के बीच के समीकरणों को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। एक तरफ जहाँ दुनिया गाजा में जारी मानवीय संकट और इजराइल-हमास युद्ध को लेकर चिंतित है, वहीं दूसरी ओर 'एमिराती लीक्स' (Emirati Leaks) द्वारा साझा किए गए एक गुप्त सरकारी दस्तावेज ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।
इस लीक दस्तावेज के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने न केवल इजराइल के साथ अपने कूटनीतिक रिश्ते बनाए रखे हैं, बल्कि रेड सी (लाल सागर) में स्थित अपने सैन्य ठिकानों के जरिए इजराइल को सीधी सैन्य, खुफिया और लॉजिस्टिक मदद भी पहुंचाई है।
रेड सी के सैन्य ठिकानों का इजराइल के लिए इस्तेमाल?
लीक हुए दस्तावेज में सबसे सनसनीखेज दावा यह है कि UAE ने यमन, इरिट्रिया और सोमालिया के तटों पर स्थित अपने रणनीतिक सैन्य ठिकानों को इजराइल की मदद के लिए खोल दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इन ठिकानों का इस्तेमाल इजराइल की सैन्य कार्रवाई को मजबूती देने और खुफिया जानकारी साझा करने के लिए किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह जानकारी पूरी तरह पुख्ता होती है, तो यह आधुनिक इतिहास में किसी अरब देश द्वारा इजराइल को दी गई अब तक की सबसे प्रत्यक्ष सैन्य सहायता होगी। दस्तावेज में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य फिलिस्तीन में सक्रिय सशस्त्र संगठनों (जिन्हें दस्तावेज में 'आतंकी' संबोधित किया गया है) के खिलाफ इजराइल के अभियान को सफल बनाना था।
एक अरब डॉलर की 'खुफिया डील' का सच
दस्तावेज केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। इसमें वित्तीय और तकनीकी सहयोग का भी ब्यौरा दिया गया है। 'एमिराती लीक्स' के अनुसार:
- UAE ने इजराइल को 1 अरब डॉलर (लगभग 8,300 करोड़ रुपये) के उन्नत खुफिया उपकरण और जासूसी तकनीक मुहैया कराई है।
- दोनों देशों के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग (खुफिया जानकारी साझा करना) के लिए एक समर्पित चैनल बनाया गया।
- आतंकवाद विरोधी अभियानों के नाम पर इजराइली सैन्य तकनीक को अमीराती सेना में एकीकृत किया गया।
यह पत्र अक्टूबर 2023 का बताया जा रहा है, जिसे 'UAE रेड क्रिसेंट अथॉरिटी' के चेयरमैन हमदान बिन जायद अल-नाहयान ने लिखा था। यह पत्र सीधे UAE सशस्त्र बलों के 'जॉइंट ऑपरेशंस कमांड' को संबोधित किया गया था, जो इसकी गंभीरता को दर्शाता है।
अब्राहम समझौते की आड़ में गहराते रिश्ते
2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुए 'अब्राहम अकॉर्ड्स' ने UAE और इजराइल के बीच की दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म कर दिया था। लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि यह रिश्ता इतनी जल्दी सैन्य गठबंधन में बदल जाएगा।
हाल ही में UAE ने इजराइल में अपनी स्थायी एम्बेसी के लिए जमीन खरीदी है। किसी भी अरब देश द्वारा इजराइल की धरती पर जमीन खरीदकर दूतावास बनाना एक ऐतिहासिक और विवादित कदम माना जा रहा है। लीक दस्तावेज कहते हैं कि यह 'भाईचारा' केवल कागजों पर नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान में भी दिख रहा है।
कतर और कुवैत पर गंभीर आरोप: अरब एकता में दरार?
इस लीक दस्तावेज की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल इजराइल की तारीफ नहीं है, बल्कि अपने ही पड़ोसी अरब देशों पर निशाना साधा गया है।
- कतर पर आरोप: दस्तावेज में दावा किया गया है कि कतर ने हमास को खुला समर्थन देकर पूरे क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डाला है। UAE ने कतर की भूमिका को 'नकारात्मक' बताया है।
- कुवैत पर निशाना: रिपोर्ट में कुवैत पर आरोप लगाया गया है कि उसने फिलिस्तीनी लड़ाकू संगठनों को भारी वित्तीय सहायता दी है। यहाँ तक कि UAE ने कुवैत को अपने 'विरोधी देशों' की सूची में शामिल करने तक की बात कही है, जो खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के बीच बढ़ती अंदरूनी खींचतान को उजागर करता है।
क्या है इस खुलासे के मायने?
यह रिपोर्ट एक ऐसे समय में आई है जब पूरा मुस्लिम जगत गाजा में इजराइली बमबारी का विरोध कर रहा है। ऐसे में UAE का इजराइल को गुप्त रूप से मदद देना उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का क्या कहना है? वरिष्ठ विश्लेषकों के अनुसार, UAE खुद को एक आधुनिक और कट्टरपंथ विरोधी देश के रूप में स्थापित करना चाहता है। उसे लगता है कि हमास और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे संगठन उसके अपने राजशाही ढांचे के लिए खतरा हैं। इसीलिए, वह इजराइल के साथ हाथ मिलाकर इन ताकतों को कमजोर करना चाहता है।
सोशल मीडिया और वैश्विक प्रतिक्रिया
इस खबर के बाहर आते ही सोशल मीडिया पर #UAE_Betrayal और #GazaLeaks जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर UAE सरकार ने अभी तक इन दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर कोई बयान जारी नहीं किया है। लेकिन एमिराती लीक्स का दावा है कि उनके पास इस सहयोग के और भी पुख्ता सबूत मौजूद हैं।
निष्कर्ष: अरब जगत का बदलता चेहरा
गाजा युद्ध ने न केवल मानवीय तबाही मचाई है, बल्कि इसने अरब देशों के दोहरे चरित्र को भी उजागर किया है। एक तरफ जनता की सहानुभूति फिलिस्तीन के साथ है, तो दूसरी तरफ सत्ता के गलियारों में इजराइल के साथ गुप्त सौदेबाजियां हो रही हैं।
onewshindi.com इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे ही इस लीक पर कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया आती है, हम आप तक सबसे पहले पहुंचाएंगे।
क्या आपको लगता है कि अरब देशों को इजराइल के साथ ऐसे गुप्त समझौते करने चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
Source: TV9


