sliderimg
बड़ी खबर/न्यूज़/vande bharat sleeper low class thinking in high tech journey passengers are impressed by the luxurious facilities but people s blood boils after seeing the filth

वंदे भारत स्लीपर: हाई-टेक सफर में 'लो-क्लास' सोच? आलीशान सुविधाओं पर फिदा यात्री, पर गंदगी देख उबला लोगों का खून!

हावड़ा-गुवाहाटी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के दो वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ वर्ल्ड क्लास सुविधाएं और आलीशान इंटीरियर यात्रियों का दिल जीत रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यात्रियों द्वारा फैलाई गई गंदगी ने सिविक सेंस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या हम वाकई इन सुविधाओं के हकदार हैं? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

वंदे भारत स्लीपर: हाई-टेक सफर में 'लो-क्लास' सोच? आलीशान सुविधाओं पर फिदा यात्री, पर गंदगी देख उबला लोगों का खून!

वंदे भारत स्लीपर: "शर्मनाक! सफर खत्म होते ही ट्रेन को कूड़ेदान बना गए यात्री"

हावड़ा-गुवाहाटी

2:43 PM, Jan 19, 2026

O News हिंदी Desk

वंदे भारत स्लीपर: हाई-टेक सफर में 'लो-क्लास' सोच? सुविधाओं पर फिदा यात्री, पर गंदगी देख उठता है एक ही सवाल- हम कब सुधरेंगे?

नई दिल्ली/हावड़ा: भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ चुका है। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन (Vande Bharat Sleeper Train) हावड़ा और गुवाहाटी के बीच अपनी रफ़्तार भर रही है। जहाँ एक तरफ इस ट्रेन की आलीशान सुख-सुविधाओं ने यात्रियों का दिल जीत लिया है, वहीं दूसरी ओर सफर के बाद की कुछ तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है।

क्या हम वाकई वर्ल्ड क्लास सुविधाओं के हकदार हैं? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि ट्रेन के भीतर के दो वायरल वीडियो ने 'सभ्य नागरिक' होने के हमारे दावों की पोल खोल दी है।

*****

'वाह' और 'आह' के बीच फंसी वंदे भारत स्लीपर

सोशल मीडिया पर इस वक्त वंदे भारत स्लीपर से जुड़े दो तरह के वीडियो ट्रेंड कर रहे हैं। पहले वीडियो में जहाँ ट्रेन की इंटरनेशनल लेवल की खूबसूरती और शानदार इंटीरियर को देखकर लोग 'वाह-वाह' कर रहे हैं, वहीं दूसरे वीडियो को देखकर आपके मुंह से 'आह' निकल जाएगी।

ट्रेन की यात्रा समाप्त होने के बाद जब कोच खाली हुए, तो वहां का मंजर किसी साधारण लोकल ट्रेन से भी बदतर नजर आया। यात्रियों ने पीछे छोड़ दिया था तो सिर्फ कचरा—खाली बोतलें, इस्तेमाल किए हुए टिश्यू पेपर और आइसक्रीम के खाली पैकेट।

VIDEO 1: जब लगा कि हम विदेश में सफर कर रहे हैं

एक मशहूर यूट्यूबर द्वारा शेयर किए गए पहले वीडियो में वंदे भारत स्लीपर के सेकंड एसी (2AC) कोच की भव्यता दिखाई गई है। इस ट्रेन में यात्रियों को मिलने वाले अनुभव को इन बिंदुओं में समझा जा सकता है:

  1. आलीशान कंबल और कवर: अब तक ट्रेनों में मिलने वाले कंबलों को लेकर यात्रियों की शिकायत रहती थी कि वे साफ नहीं होते। लेकिन वंदे भारत स्लीपर में कंबलों के साथ बेहद खूबसूरत प्रिंट वाले हाइजीनिक कवर दिए गए हैं।
  2. प्रीमियम इंटीरियर: कोच के पर्दे, लाइटिंग और सस्पेंशन सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आपको लगेगा ही नहीं कि आप ट्रेन में हैं। यात्रियों का कहना है कि यह अनुभव किसी फ्लाइट से कम नहीं है।
  3. सॉफ्ट टच सीटें: पुरानी ट्रेनों के मुकाबले इसकी सीटें कहीं अधिक आरामदायक और कुशन वाली हैं।
*****

VIDEO 2: कचरे के ढेर और वो 'पुराना' रवैया

दूसरे वीडियो ने प्रशासन और जागरूक नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। हावड़ा-गुवाहाटी रूट पर सफर खत्म होने के बाद कोच के भीतर का दृश्य बेहद निराशाजनक था।

"सवाल यह नहीं है कि रेलवे क्या दे रहा है, सवाल यह है कि हम उसे कैसे संभाल रहे हैं। मूंगफली के छिलके फर्श पर फेंकना और खाली डिब्बे सीटों के नीचे दबा देना—क्या यही हमारा सिविक सेंस है?"

वायरल वीडियो बनाने वाले शख्स ने तंज कसते हुए पूछा कि इस गंदगी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? क्या हर सीट के पास डस्टबिन होने के बावजूद कचरा नीचे फेंकना सरकार की गलती है? या यह हमारी अपनी मानसिकता की कमी है?

Video Credit :- @Indianinfoguide

*****

यात्रियों की जुबानी: सुविधाओं की 'सुनामी' पर जागरूकता की कमी

ट्रेन में सफर कर रहे विभिन्न आयु वर्ग के यात्रियों ने अपने अनुभव साझा किए। सौरभ नाम के एक यात्री ने बताया, "यह ट्रेन गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए एक वरदान है। इतने कम किराए में ऐसी प्रीमियम सुविधाएं मिलना नामुमकिन था। चार्जिंग पोर्ट से लेकर बायो-वैक्यूम टॉयलेट्स तक, सब कुछ वर्ल्ड क्लास है।"

वहीं, एक महिला यात्री ने एक बहुत ही पते की बात कही। उन्होंने कहा, "प्रशासन अपना काम कर रहा है, लेकिन अब जिम्मेदारी हमारी है। अगर हम अपनी निजी कार में कचरा नहीं फैलाते, तो इस राष्ट्रीय संपत्ति को गंदा करने का हक हमें किसने दिया? हमें खुद अपनी साफ-सफाई की जिम्मेदारी लेनी होगी।"

एक बुजुर्ग यात्री ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में रेलवे का इतना विकास पहले कभी नहीं देखा। चौड़ी सीटें और झटकों से मुक्त सफर उनके जैसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए किसी उपहार से कम नहीं है।

*****

वंदे भारत स्लीपर की 5 बड़ी खूबियाँ जो इसे बनाती हैं खास

यह ट्रेन सिर्फ रफ्तार के लिए नहीं, बल्कि यात्रियों की सहूलियत के लिए जानी जा रही है:

  1. कवच प्रणाली: सुरक्षा के लिहाज से इसमें 'कवच' तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो दो ट्रेनों की टक्कर को रोकती है।
  2. ऑटोमैटिक दरवाजे: मेट्रो की तर्ज पर इसमें स्वचालित दरवाजे और इंटर-कनेक्टिंग गेट्स दिए गए हैं।
  3. बेहतर सस्पेंशन: ऊबड़-खाबड़ पटरियों पर भी आपको झटके महसूस नहीं होंगे।
  4. मॉड्यूलर टॉयलेट्स: एर्गोनोमिक डिजाइन के साथ साफ-सुथरे और बदबू रहित शौचालय।
  5. रीडिंग लाइट्स और चार्जिंग: हर बर्थ के लिए अलग रीडिंग लाइट और मोबाइल चार्जिंग पॉइंट।
*****

क्या हम आधुनिक भारत के लिए तैयार हैं? (संपादकीय दृष्टिकोण)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को हावड़ा से इसे हरी झंडी दिखाई थी। बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने का यह सबसे बड़ा कदम है। लेकिन, तकनीकी विकास तब तक अधूरा है जब तक नागरिक बोध (Civic Sense) का विकास न हो।

सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि "ट्रेन तो 2026 की आ गई है, लेकिन यात्रियों की सोच अभी भी 1990 वाली ही है।" अगर हम चाहते हैं कि ऐसी और भी ट्रेनें चलें और वे इसी तरह चमकती रहें, तो हमें 'यूज एंड थ्रो' वाली इस गंदी आदत को छोड़ना होगा।

निष्कर्ष

वंदे भारत स्लीपर सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि बदलते भारत की तस्वीर है। यह तस्वीर तभी सुंदर रहेगी जब इसमें सफर करने वाला हर यात्री इसे अपना घर समझेगा। अगली बार जब आप इस ट्रेन में बैठें, तो याद रखें—सुविधाएं सरकार देती है, लेकिन साख नागरिक बनाते हैं।

*****

आप क्या सोचते हैं? क्या ट्रेनों में कचरा फैलाने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए? या फिर जागरूकता ही एकमात्र रास्ता है? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

Source: NDTV

headingicon

सम्बंधित खबर

Landline Number: +91-11-47517355

Follow Us:

InstagramYouTube

© Copyright O News Hindi 2025. All rights reserved.