आखिर क्यों मांगनी पड़ी अभिजीत दीपके को माफ़ी? जाने पूरी खबर
मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के बाद जमीनी स्थिति का जायजा लेने पहुंचे CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को इन्फ्लुएंसर्स ने घेरा। जानिए इस पूरे विवाद और हाईकोर्ट के सख्त रुख से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट।

आखिर क्यों मांगनी पड़ी अभिजीत दीपके को माफ़ी? जाने पूरी खबर
मध्य प्रदेश
1:28 PM, Sep 17, 2026
O News हिंदी Desk
आखिर क्यों मांगनी पड़ी अभिजीत दीपके को माफ़ी? जाने पूरी खबर: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके का जोरदार विरोध देखने को मिला है।
शनिवार को अभिजीत दीपके जिले के उन दूरदराज के आदिवासी गांवों (जैसे आदोरी, कोरका और बोंदारी) में पहुंचे थे, जहां हाल ही में संक्रामक बीमारियों की वजह से कई बच्चों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। उनका मकसद सिर्फ इतना जानना था कि वहां अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं का क्या हाल है, लेकिन मौके पर जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया।
जैसे ही अभिजीत दीपके वहां पहुंचे, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और खुद को 'इन्फ्लुएंसर्स' बताने वाले कुछ लोगों का एक समूह वहां आ गया और उसने उनकी गाड़ी को घेर लिया। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक महिला इन्फ्लुएंसर उनके सामने माइक लेकर ताबड़तोड़ सवाल दाग रही है। महिला ने उन पर सीधा आरोप लगाया कि वह यहां सिर्फ 'लाशों पर राजनीति' करने आए हैं और इतनी देरी से क्यों पहुंचे हैं।
हालांकि, वीडियो में दीपके काफी सहज नजर आए और उन्होंने देरी के लिए माफी भी मांगी। लेकिन माहौल तब और गरमा गया जब बहस बढ़ने लगी। इसके बाद सीजेपी कार्यकर्ताओं ने बीच-बचव कर अभिजीत को दूसरी गाड़ी में बैठाया और वहां से सुरक्षित निकाल ले गए। जाते वक्त वह महिला यह चिल्लाती हुई भी सुनी गई कि "भाग गए, भाग गए।"
इस पूरी घटना के बाद स्थानीय पत्रकारों ने भी हैरानी जताई है। उनका कहना है कि इतने अंदरूनी और पिछड़े गांवों में अचानक से इन बाहरी इन्फ्लुएंसर्स का पहुंचना और इस तरह का हंगामा करना किसी प्रायोजित साजिश की तरफ इशारा करता है, हालांकि इस बात का कोई पक्का सबूत सामने नहीं आया है।
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दूसरी तरफ, बालाघाट के इन आदिवासी इलाकों में बच्चों की हो रही मौतों का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच चुका है और सरकार पर शिकंजा कसता जा रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने इस गंभीर मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से कड़ा जवाब मांगा है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और बालाघाट के कलेक्टर को नोटिस थमा दिए हैं।
याचिका में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि बच्चों को वक्त पर इलाज नहीं मिल रहा है और हालात इतने बदतर हैं कि सिर्फ 50 बेड वाले अस्पताल में 400 से ज्यादा बच्चों का इलाज चल रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार कोर्ट के सामने क्या सफाई पेश करती है।
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