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बड़ी खबर/न्यूज़/decades of wait is over yogi government gave permanent home and respect to 99 displaced hindu families

दशकों का इंतज़ार खत्म! विस्थापित 99 हिंदू परिवारों को योगी सरकार ने दिया स्थायी आशियाना और सम्मान

"योगी सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान से आए 99 हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन को मंजूरी दी है। मेरठ में झील की जमीन पर रह रहे इन परिवारों को अब कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील में 0.50 एकड़ जमीन और 90 साल का पट्टा मिलेगा। जानें योगी कैबिनेट के इस बड़े और मानवीय फैसले की पूरी जानकारी।"

दशकों का इंतज़ार खत्म! विस्थापित 99 हिंदू परिवारों को योगी सरकार ने दिया स्थायी आशियाना और सम्मान

पूर्वी पाकिस्तान के हिंदू परिवारों को योगी सरकार का तोहफा.!

उत्तर प्रदेश

1:29 PM, Jan 30, 2026

O News हिंदी Desk

योगी सरकार का बड़ा मानवीय निर्णय: पूर्वी पाकिस्तान से आए 99 हिंदू परिवारों को कानपुर देहात में मिलेगा स्थायी आशियाना

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बार फिर अपने संवेदनशील और निर्णायक नेतृत्व का परिचय दिया है। दशकों से बेघर और अस्थायी बस्तियों में रह रहे 99 हिंदू बंगाली परिवारों के लिए अब अच्छे दिन आने वाले हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इन विस्थापित परिवारों के पुनर्वासन (Rehabilitation) के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है।

यह फैसला न केवल इन परिवारों के जीवन में स्थिरता लाएगा, बल्कि दशकों पुराने भूमि विवाद और अतिक्रमण की समस्या का भी स्थायी समाधान करेगा।

दशकों पुराना इंतज़ार और मेरठ का संघर्ष

यह पूरा मामला मेरठ जनपद की मवाना तहसील के अंतर्गत आने वाले नंगला गोसाई गाँव से जुड़ा है। यहाँ पूर्वी पाकिस्तान (जो अब बांग्लादेश है) से आए 99 हिंदू बंगाली परिवार पिछले कई दशकों से रह रहे थे। विडंबना यह थी कि ये परिवार जिस जमीन पर बसे हुए थे, वह सरकारी अभिलेखों में झील (Wetland) के रूप में दर्ज थी।

कानूनी रूप से झील की जमीन पर किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण या निवास प्रतिबंधित होता है। इस कारण ये परिवार हमेशा बेदखली के डर में जी रहे थे। झील की जमीन पर 'अवैध' निवास होने के कारण उन्हें न तो सरकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ मिल पा रहा था और न ही वे अपने भविष्य को सुरक्षित महसूस कर रहे थे।

कानपुर देहात बनेगा नया ठिकाना: कैबिनेट के फैसले की मुख्य बातें

योगी कैबिनेट ने इन 99 परिवारों की मानवीय स्थिति को समझते हुए उन्हें कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील में बसाने का निर्णय लिया है। प्रशासन ने इसके लिए दो अलग-अलग गाँवों में जमीन चिह्नित की है:

  1. ग्राम भैंसाया: यहाँ पुनर्वास विभाग की 11.1375 हेक्टेयर (लगभग 27.5 एकड़) जमीन उपलब्ध है, जहाँ 50 परिवारों को बसाया जाएगा।
  2. ग्राम ताजपुर तरसौली: यहाँ विभाग की 10.530 हेक्टेयर (लगभग 26 एकड़) जमीन पर शेष 49 परिवारों का पुनर्वासन किया जाएगा।

पट्टे और आवंटन की शर्तें

सरकार ने इन परिवारों के आर्थिक और सामाजिक हितों का पूरा ध्यान रखा है:

  1. भूमि का आकार: प्रत्येक विस्थापित परिवार को 0.50 एकड़ (आधा एकड़) कृषि योग्य और आवासीय भूमि आवंटित की जाएगी।
  2. लीज की अवधि: यह जमीन 30 साल के पट्टे पर दी जाएगी।
  3. नवीनीकरण: इस पट्टे को 30-30 साल के अंतराल पर दो बार रिन्यू किया जा सकेगा, यानी कुल 90 वर्षों तक इन परिवारों का इस जमीन पर वैधानिक अधिकार रहेगा।
  4. प्रीमियम: यह आवंटन मामूली प्रीमियम या लीज रेंट पर आधारित होगा, ताकि परिवारों पर वित्तीय बोझ न पड़े।
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पर्यावरण संरक्षण और मानवीय गरिमा का संतुलन

इस निर्णय के पीछे योगी सरकार के दो मुख्य उद्देश्य स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं:

1. पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा (Environment Protection)

मेरठ के नंगला गोसाई में जिस झील की जमीन पर ये परिवार रह रहे थे, वह स्थानीय पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण थी। अतिक्रमण के कारण जल निकाय (Water body) का अस्तित्व संकट में था। पुनर्वासन के इस फैसले से अब झील को अतिक्रमण मुक्त किया जा सकेगा और उसे दोबारा जीवित किया जा सकेगा।

2. सम्मानजनक जीवन का अधिकार

विस्थापित बंगाली परिवार लंबे समय से एक 'अस्थायी' पहचान के साथ जी रहे थे। कानपुर देहात में जमीन मिलने के बाद अब उनके पास अपनी छत होगी, अपना खेत होगा और सबसे बड़ी बात—उनके पास एक स्थायी पता होगा। यह कदम उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा।

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उत्तर प्रदेश में विस्थापितों का पुनर्वास: एक बड़ा विजन

यह पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने विस्थापितों के प्रति इतनी तत्परता दिखाई है। इससे पहले भी पूर्वी पाकिस्तान के विस्थापितों को खेती और आवास के लिए जमीनें आवंटित की गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट मानना है कि जो हिंदू परिवार विभाजन या धार्मिक उत्पीड़न की त्रासदी झेलकर भारत आए हैं, उन्हें सम्मान के साथ जीने का पूरा अधिकार है।

कानपुर देहात के जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि पुनर्वासन की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से और समयबद्ध सीमा के भीतर पूरा किया जाए। रसूलाबाद में मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क, बिजली और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भी योजना बनाई जा रही है।

निष्कर्ष: एक नए युग की शुरुआत

99 परिवारों के लिए यह खबर किसी उत्सव से कम नहीं है। मेरठ की असुरक्षा से कानपुर देहात की स्थिरता तक का यह सफर इन परिवारों की आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बदल देगा। योगी कैबिनेट का यह फैसला संदेश देता है कि सरकार कानून के पालन (झील संरक्षण) के साथ-साथ अपने नागरिकों के कल्याण के प्रति भी समान रूप से प्रतिबद्ध है।

आने वाले महीनों में जब ये परिवार अपनी नई जमीन पर गृह प्रवेश करेंगे, तो यह उत्तर प्रदेश के समावेशी विकास की एक नई कहानी लिखेगा।

Source: Onewshindi

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